अकाल तख्त के सामने हाजिर हुए पंजाब के सिख विधायक और मंत्री, बेअदबी कानून पर मांगा गया स्पष्टीकरण

पंजाब सरकार द्वारा पारित बेअदबी रोकथाम कानून पर उठे विवाद के बीच राज्य के सभी सिख मंत्रियों और विधायकों ने अमृतसर में अकाल तख्त के समक्ष अपना पक्ष रखा। अकाल तख्त ने इस कानून को सिख पंथ की भावनाओं के विरुद्ध बताते हुए इसमें सुधार करने के लिए एक महीने का समय दिया है।

अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए पंजाब के सिख जनप्रतिनिधि

अमृतसर में सोमवार का दिन पंजाब की राजनीति के लिए बेहद अहम रहा। राज्य के सभी सिख कैबिनेट मंत्री और सिख विधायक अकाल तख्त के समक्ष उपस्थित हुए। यह कदम अकाल तख्त द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी को रोकने के लिए लाए गए नए कानून के संबंध में स्पष्टीकरण मांगने के बाद उठाया गया। जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने 15 जून को ही यह निर्देश जारी कर दिया था कि सभी दलों के सिख विधायकों और मंत्रियों को अकाल तख्त के सामने आकर जवाब देना होगा। दूसरी ओर, जो मंत्री सिख धर्म से संबंधित नहीं हैं, उन्हें इस पूरे मामले पर अपना लिखित रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान को इस बार तलब नहीं किया गया था।

कानून पर विवाद की जड़

विवाद के केंद्र में 'जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026' है। अकाल तख्त का साफ आरोप है कि इस विधेयक को पंजाब विधानसभा में पेश करने या पारित करने से पहले सिख पंथ के किसी भी विशेषज्ञ या निकाय से सलाह नहीं ली गई। यह विधेयक 13 अप्रैल को विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इस कानून में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वाले दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा देने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, अकाल तख्त का कहना है कि इसके कई प्रावधान खालसा पंथ और संगत की धार्मिक भावनाओं के बिल्कुल विपरीत हैं। पेशी के दौरान कुल 29 विधायक और नौ मंत्री अकाल तख्त के सामने मौजूद थे, जिनमें सात कांग्रेस, दो शिरोमणि अकाली दल और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं।

अकाल तख्त ने दिया एक महीने का अल्टीमेटम

अकाल तख्त साहिब ने पंजाब सरकार को कड़ी हिदायत दी है कि वे इस प्रस्तावित कानून में मौजूद आपत्तियों को तत्काल प्रभाव से दूर करें। जत्थेदार ने इसके लिए सरकार को एक महीने का समय दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि इन आपत्तियों को दूर करने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना पड़े, तो सरकार उसे भी आयोजित करे। सबसे बड़ी बात यह है कि जब तक अकाल तख्त की चिंताओं का समाधान नहीं हो जाता, तब तक इस कानून को रोक दिया गया है। अकाल तख्त ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि वे संप्रदाय के अधिकारों में हस्तक्षेप न करें। जत्थेदार गड़गज के अनुसार, जो काम अकाल तख्त का है, उसमें सरकार का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज का कड़ा रुख

जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सिख धर्म के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार की दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जब बिल विधानसभा में लाया जा रहा था, उसी समय उन्होंने सरकार को आगाह किया था कि यह एक बड़ी गलती है। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि हम भी यही चाहते हैं कि बेअदबी करने वालों को कठोर से कठोर सजा मिले, लेकिन प्रक्रिया सही होनी चाहिए। जत्थेदार ने खुलासा किया कि जब उन्होंने विधायकों से पूछा कि क्या उन्होंने कानून के प्रावधानों को पढ़ा है, तो उनमें से कई ने स्वीकार किया कि उन्होंने इसे पढ़ा ही नहीं है।

सरकार पर धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप

पत्रकारों से बातचीत करते हुए जत्थेदार ने आम आदमी पार्टी की सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि वे अकाल तख्त के कार्यक्षेत्र को सीमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि बेअदबी कानून का सहारा लेकर सरकार गुरु और सिख संगत के बीच एक दीवार खड़ी करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को सिख पंथ की मर्यादा और भावनाओं का सम्मान करते हुए ही कोई कदम उठाना चाहिए।

अकाल तख्त पहुंचे सिख जनप्रतिनिधियों की सूची

अकाल तख्त के सामने पेश होने वाले प्रमुख लोगों में कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा, गुरमीत सिंह खुद्दियां, बलबीर सिंह, हरजोत सिंह बैंस, हरभजन सिंह ईटीओ, हरदीप सिंह मुंडियन, बलजीत कौर, तरुणप्रीत सिंह सोंड, और रवजोत सिंह शामिल रहे। इनके अलावा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान भी उपस्थित थे। आप विधायकों की सूची में कुलवंत सिंह, जीवन सिंह सांगोवाल, मनविंदर सिंह गियासपुरा, सरवजीत कौर मानुके, देविंदरजीत सिंह लड्डी, फौजा सिंह सरारी, नरिंदर पाल सिंह सावना, अमनदीप सिंह, जगदीप सिंह, गुरदित सिंह, अमलोक सिंह, बलकार सिद्धू, जगरूप गिल, बलजिंदर कौर, अमनशेर सिंह शेरी कालसी, अमरपाल सिंह, गुरदीप सिंह, कुलदीप धालीवाल, जसबीर सिंह, जीवन ज्योत कौर, जसविंदर सिंह, सरवन सिंह धुन, दलबीर सिंह, इंदरबीर सिंह निज्जर, मनजीत सिंह बिलासपुर, रणबीर सिंह भुल्लर, हरदीप सिंह डिम्पी ढिल्लों, जगसीर सिंह मैसरखाना और मंजिंदर सिंह लालपुरा का नाम शामिल है। कांग्रेस से प्रताप सिंह बाजवा, बरिंदरमीत सिंह पहरा, राणा गुरजीत सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, सुखपाल सिंह खैरा और बलविंदर सिंह मौजूद रहे। अकाली दल से गनीव कौर मजीठिया और मनप्रीत सिंह अयाली पहुंचे, जबकि निर्दलीय विधायक राणा इंदर प्रताप सिंह भी वहां मौजूद थे।

क्या है सरकार का पक्ष

अकाल तख्त के निर्देश के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह स्पष्ट किया था कि उनकी पार्टी के सभी सिख विधायक और मंत्री पूरी गंभीरता के साथ वहां पेश होंगे और सरकार का लिखित पक्ष रखेंगे। वहीं, बागी अकाली विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि अकाल तख्त का हर निर्देश शिरोधार्य है और उन्हें उम्मीद है कि सरकार अकाल तख्त की सलाह मानकर कानून में संशोधन करेगी। 'आप' के विधायक गुरदीत सिंह सेखों ने दोहराया कि उनका एकमात्र उद्देश्य बेअदबी को जड़ से खत्म करना और दोषियों को सजा दिलाना है।

https://www.indiatv.in/punjab/all-sikh-ministers-of-punjab-appeared-before-akal-takht-and-gave-clarification-on-sacrilege-prevention-act-2026-06-29-1228030