बरसात में निमाड़ की शान
मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में जैसे ही बारिश की बूंदें गिरती हैं, वहां के रसोई घरों से एक खास खुशबू आने लगती है। यह खुशबू पारंपरिक व्यंजन बेसन-भाकर की होती है। मानसून के सुहावने मौसम और हल्की ठंड के बीच, यह व्यंजन हर घर की पहली पसंद बन जाता है। न केवल इसका स्वाद लाजवाब होता है, बल्कि यह क्षेत्र की संस्कृति का भी एक अभिन्न हिस्सा है।
कैसे तैयार होता है यह व्यंजन
विशेषज्ञ वंदना के अनुसार, बेसन-भाकर को बनाने की प्रक्रिया काफी धैर्य का काम है। इस पूरे व्यंजन को तैयार करने में 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है। इसके मुख्य अवयवों में बेसन, बारीक कटा हुआ प्याज, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च शामिल हैं, जिन्हें चटपटे मसालों के साथ पकाया जाता है। इसके साथ परोसी जाने वाली भाकर आमतौर पर ज्वार या बाजरे के आटे से बनाई जाती है।
चूल्हे की सोंधी खुशबू
इस रेसिपी की असली खासियत चूल्हे पर बनी भाकर है। चूल्हे की आंच पर धीमी गति से पकने वाली भाकर और बेसन का मेल इसे एक संपूर्ण आहार बनाता है। यही कारण है कि निमाड़ के लोग बारिश और सर्द मौसम में इस पारंपरिक भोजन का आनंद लेना कभी नहीं भूलते। यदि आप भी कुछ पारंपरिक और देसी स्वाद की तलाश में हैं, तो बेसन-भाकर एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है।
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