कीमती धातुओं में भारी गिरावट
भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के भाव में गिरावट का दौर थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। पिछले कुछ दिनों से जारी इस गिरावट के कारण कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों पर गौर करें तो 29 जून को सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई है। एमसीएक्स पर सोने का भाव 615 रुपये की गिरावट के साथ 143547 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। इसी तरह, चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट आई है, जहां यह धातु 1203 रुपये सस्ती होकर 220201 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर आ गई है।
कीमतों में गिरावट के पीछे के मुख्य कारण
सोने और चांदी के भाव में इस बड़ी गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण जिम्मेदार बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया है, जिसका सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर पड़ रहा है। इसके अलावा, अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में भविष्य में और बढ़ोतरी किए जाने की संभावना ने भी सोने पर दबाव बढ़ा दिया है। चूंकि सोना ब्याज आधारित निवेश नहीं है, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के दौर में सोने की मांग अक्सर कमजोर हो जाती है।
बाजार विशेषज्ञों की राय
एलकेपी सिक्योरिटीज के रिसर्च कमोडिटी और करेंसी विभाग के वाइस प्रेसिडेंट जतीन त्रिवेदी के अनुसार, पिछले पूरे सप्ताह सोने की कीमतों पर भारी दबाव बना रहा और सप्ताह के अंत तक इसमें लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने समेत अन्य कीमती धातुओं पर बिकवाली का जबरदस्त दबाव देखा गया, जिसके कारण लगातार दूसरे सप्ताह कीमतों में गिरावट का रुख रहा। गौरतलब है कि मिडिल ईस्ट में उपजे तनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से फिलहाल सोना न खरीदने की अपील की थी, जिसका असर बाजार की धारणा पर साफ देखा जा सकता है।
पुराना सोना बेचने वालों की संख्या बढ़ी
देशभर में लोग अब बड़ी संख्या में अपना पुराना सोना बाजार में बेच रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि निवेशकों और आम लोगों को डर है कि सोने की कीमतें अब अपने ऊपरी स्तर को छू चुकी हैं और भविष्य में इनमें और अधिक गिरावट आ सकती है। इसी डर और ऊंचे दाम का लाभ उठाने के इरादे से लोग अपने पुराने गहने बाजार में बेच रहे हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी आईबीजेए के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल अप्रैल-जून तिमाही के दौरान लोगों ने करीब 50 टन पुराना सोना बाजार में बेचा है, जो कि पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 43% अधिक है।
गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहकों पर असर
सोने की कीमतों में पिछले पांच महीनों के दौरान आई तेज गिरावट का असर गोल्ड लोन लेने वाले ग्राहकों पर भी पड़ रहा है। जो ग्राहक बुलेट रीपेमेंट गोल्ड लोन ले रखे हैं, उन्हें अब मार्जिन कॉल का सामना करना पड़ रहा है। इस तरह के लोन में पूरी रकम और ब्याज एक साथ चुकाना पड़ता है, जो अब ग्राहकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, जिन गोल्ड लोन में नियमित मासिक किश्तें यानी ईएमआई के माध्यम से भुगतान होता है, उन पर इसका असर अभी काफी कम दिखाई दे रहा है।
रिकॉर्ड स्तर से कितना फिसला सोना
घरेलू बाजार की स्थिति का आकलन करें तो सोने की कीमतें जनवरी महीने के अंतिम सप्ताह में दर्ज किए गए अपने रिकॉर्ड स्तर से अब तक करीब 22% नीचे आ चुकी हैं। इससे पहले मार्च महीने में जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा था, तब भी सोने की कीमतों में 15% के करीब गिरावट देखी गई थी। हालांकि बाद में कुछ समय के लिए कीमतें एक निश्चित दायरे में स्थिर हो गई थीं, लेकिन फेडरल रिजर्व के रुख के बाद फिर से बिकवाली का दबाव हावी हो गया है। 16 जून को सोने की कीमत 157879 रुपये थी, जो 24 जून तक गिरकर 144162 रुपये पर आ गई थी, जो बाजार की मौजूदा अस्थिरता को दर्शाता है।
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