दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे हादसे से लें सीख: सड़क पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, जा सकती है जान

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर हुई एक हालिया दुखद घटना ने सुरक्षा मानकों की ओर फिर से ध्यान खींचा है, जिसमें चार लोगों की जान चली गई। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए ड्राइविंग के दौरान इन पांच नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की घटना से मिले कड़े सबक

हाल ही में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर हुए एक भीषण हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद घटना में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हादसा महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक्सप्रेसवे पर ड्राइविंग के दौरान बरती गई गंभीर लापरवाही का नतीजा है। सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट देखा गया कि गाड़ी का एग्जिट मिस होने के बाद चालक ने हाईवे पर ही रिवर्स गियर डाल दिया, जिसके चलते पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार एसयूवी ने उसे टक्कर मार दी। यह घटना हमें यह चेतावनी देती है कि एक्सप्रेसवे की तेज रफ्तार और आधुनिक बनावट के बावजूद, हमारी एक छोटी सी गलती जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन सकती है।

एक्सप्रेसवे पर इन 5 गलतियों से बचें

सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए आपको इन पांच महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए, जो आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं:

  • स्पीड लिमिट का पालन: एक्सप्रेसवे पर अमूमन 80 से 100 किमी/घंटा की गति सीमा निर्धारित होती है। इसे अपनी क्षमता का प्रदर्शन न समझें। खराब मौसम, बारिश या कोहरे के दौरान अपनी गति को और कम कर लें। आगे चल रही गाड़ी से हमेशा कम से कम 4 से 5 सेकंड की सुरक्षित दूरी बनाए रखें ताकि अचानक ब्रेक लगाने की नौबत न आए।
  • लेन अनुशासन और ओवरटेकिंग: एक्सप्रेसवे पर लेन का नियम बहुत स्पष्ट है। हमेशा बाईं लेन में गाड़ी चलाएं और दाईं लेन का इस्तेमाल केवल ओवरटेकिंग के लिए ही करें। बिना इंडिकेटर दिए लेन बदलना या धीमी गति से चलने वाले वाहनों को राइट लेन में रोकना बड़े हादसों को न्योता देता है। लेन बदलते समय हमेशा अपने साइड मिरर और रियर व्यू मिरर को अच्छी तरह जांचें।
  • रिवर्स लेने की जानलेवा भूल: हाईवे पर एग्जिट निकल जाने का मतलब यह कतई नहीं है कि आप गाड़ी को रिवर्स करें या गलत दिशा (रॉन्ग साइड) में चलाएं। यह सीधे मौत को दावत देना है। अगर आपसे एग्जिट छूट जाए, तो अगली निकासी या यू-टर्न आने का धैर्य के साथ इंतजार करें।
  • सतर्कता और थकान प्रबंधन: लंबी दूरी की यात्रा के दौरान थकान महसूस होना स्वाभाविक है। हर 2 से 3 घंटे की ड्राइविंग के बाद ब्रेक लें। मोबाइल फोन का इस्तेमाल ड्राइविंग के दौरान बिल्कुल न करें और म्यूजिक सुनते समय भी सड़क पर पूरी सतर्कता रखें। अगर आपको नींद महसूस हो, तो तुरंत गाड़ी किनारे रोकें या किसी और साथी को गाड़ी चलाने के लिए दें।
  • इमरजेंसी प्रोटोकॉल: यात्रा शुरू करने से पहले टायर प्रेशर, ब्रेक, इंजन ऑयल और लाइट्स की जांच जरूर करें। खराब मौसम में फॉग लैंप का इस्तेमाल करें। किसी भी दुर्घटना या ब्रेकडाउन की स्थिति में हेजर्ड लाइट्स जलाएं, सड़क पर चेतावनी के लिए रिफ्लेक्टिव ट्रायंगल लगाएं और हाईवे पर पैदल न चलें। सहायता के लिए एनएचएआई (NHAI) हेल्पलाइन नंबर या अधिकृत ऐप का उपयोग करें।

सुरक्षा ही जीवन है

एक्सप्रेसवे पर ड्राइविंग कोई सामान्य अनुभव नहीं है, बल्कि यह निरंतर सतर्कता और जिम्मेदारी का कार्य है। हमेशा अपनी और अपने साथ बैठे सवारियों की सीट बेल्ट जरूर लगाएं। बच्चों को हमेशा पीछे की सीट पर बिठाएं ताकि दुर्घटना की स्थिति में उन्हें सुरक्षा मिल सके। याद रखें, आप घर से जल्दी पहुंचने के लिए निकलते हैं, लेकिन सुरक्षित पहुंचना सबसे ज्यादा जरूरी है। इन सावधानियों को अपनाकर न केवल आप अपनी जान बचा सकते हैं, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों के लिए भी एक जिम्मेदार चालक बन सकते हैं। आपकी थोड़ी सी समझदारी किसी का घर उजड़ने से बचा सकती है।

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