स्कूल खुलने का समय और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां
गर्मी की लंबी छुट्टियों का दौर अब खत्म होने को है और आगामी 1 जुलाई से स्कूलों में फिर से चहल-पहल शुरू हो जाएगी। छात्र स्कूल जाने के लिए पूरी तरह उत्साहित हैं, लेकिन अभिभावकों के लिए यह समय विशेष सतर्कता बरतने का है। कारण यह है कि स्कूल खुलने का समय सीधे तौर पर मानसून के आगमन से मेल खाता है। इस मौसम में बच्चों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की प्रबल संभावना रहती है। दरअसल, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी बड़ों की तुलना में कम होती है, जिसके कारण वे संक्रमण की चपेट में जल्दी आते हैं। इस दौरान खांसी, जुकाम, बुखार और पेट से जुड़ी कई तरह की बीमारियां तेजी से फैलती हैं।
स्कूल दोबारा खुलने का प्रभाव
नारायणा हेल्थ एसआरसीसी चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल में बाल चिकित्सा सलाहकार के रूप में कार्यरत डॉक्टर नेहल शाह के अनुसार, चिकित्सा जगत में इस स्थिति को अक्सर स्कूल दोबारा खुलने के प्रभाव के रूप में देखा जाता है। उमस भरा वातावरण और स्कूल की कक्षाओं में बच्चों की बढ़ती भीड़ संक्रमण के प्रसार को और अधिक गति प्रदान करती है।
स्कूल जाने वाले बच्चे संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों होते हैं
डॉक्टर शाह के तर्कों के अनुसार, बच्चे अपनी गर्मियों की छुट्टियों का एक बड़ा हिस्सा घरों के सुरक्षित वातावरण में बिताते हैं। स्कूल फिर से शुरू होते ही, वे अचानक एक-दूसरे के काफी करीब आते हैं। वे कक्षाओं में बेंच साझा करते हैं, एक-दूसरे की किताबें और स्टेशनरी का इस्तेमाल करते हैं, और खेल के दौरान खिलौने भी आपस में बदलते हैं। इस तरह के मेल-जोल से सांस के जरिए वायरस और बैक्टीरिया का प्रसार बहुत तेजी से होता है। मानसून का मौसम इस खतरे को और भी अधिक बढ़ा देता है। अधिक नमी यानी हाई ह्यूमिडिटी के चलते कई प्रकार के वायरस सतहों पर लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं। वहीं, हवा में मौजूद नमी छींकने या खांसने पर निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों को हवा में देर तक रोके रखती है। साथ ही, स्कूलों के आसपास जलभराव की स्थिति मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है, जिससे डेंगू और मलेरिया का खतरा भी बढ़ जाता है।
मानसून में होने वाली प्रमुख स्वास्थ्य समस्याएं
इस मौसम में श्वसन तंत्र से जुड़े संक्रमण जैसे सर्दी, खांसी, वायरल बुखार और ब्रोंकाइटिस का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके अलावा, दूषित आहार या अशुद्ध पेयजल के सेवन से पेट से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। रोटावायरस संक्रमण, दस्त और बैक्टीरिया के कारण पेट में होने वाले संक्रमण इस दौरान काफी आम हो जाते हैं। डॉक्टर शाह बताते हैं कि कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के साथ-साथ साफ-सफाई की कमी, जैसे कि हाथ न धोना या नाखून बड़े रखना, संक्रमण फैलने के मुख्य कारणों में शामिल हैं। साथ ही, बच्चों की नींद पूरी न होना भी उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे वे बीमार पड़ने लगते हैं।
बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सावधानियां
बच्चों को इन बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए माता-पिता और स्कूलों को निम्नलिखित बातों का पालन करना चाहिए:
- बच्चों को साफ-सफाई का महत्व समझाएं। उन्हें सिखाएं कि शौचालय का उपयोग करने के बाद, खाना खाने से पहले और स्कूल से घर लौटने पर अपने हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं।
- बच्चों को श्वसन संबंधी स्वच्छता की आदतों के बारे में बताएं। उन्हें खांसते या छींकते समय हमेशा अपनी कोहनी या टिश्यू से नाक और मुंह ढंकने के लिए प्रेरित करें।
- यदि बच्चा अस्वस्थ महसूस कर रहा है, तो उसे स्कूल न भेजें और घर पर ही आराम करने दें। स्कूल भेजने से संक्रमण के अन्य छात्रों और शिक्षकों में फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
- बच्चों के आहार में पौष्टिक सब्जियां, मौसमी फल और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें। उन्हें पीने के लिए साफ पानी दें और गुनगुना भोजन खिलाने का प्रयास करें।
- स्कूल प्रशासन को भी कक्षा, बेंच, दरवाजे के हैंडल और शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे कीटाणुओं के पनपने का खतरा कम हो सके।
- पर्याप्त नींद बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य है। पूरी नींद लेने से शरीर को रिकवर होने और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में सहायता मिलती है।
- स्कूलों को मानसून के दौरान जागरूकता सत्र आयोजित करने चाहिए ताकि बच्चे खुद स्वच्छता का महत्व समझ सकें।
- यदि बच्चे को तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई या पेट संबंधी गंभीर समस्या हो, तो उसे बिना देरी किए डॉक्टर के पास ले जाएं।
https://www.indiatv.in/health/schools-reopen-on-july-1-here-is-how-parents-can-protect-their-children-from-falling-sick-take-these-precautions-2026-06-29-1227965