बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ में बड़ा हादसा टला
राजस्थान के बीकानेर जिले से एक अत्यंत चिंताजनक मामला सामने आया है, जिसने स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के तोलियासर गांव में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब लंबी गर्मियों की छुट्टियों के बाद आज सुबह स्कूल का ताला खोला गया। स्कूल के अंदर का नजारा किसी डरावने सपने जैसा था। एक मुख्य कक्षा-कक्ष की छत की भारी-भरकम पट्टियां पूरी तरह से टूटकर जमीन पर बिखरी पड़ी थीं। सौभाग्य से, यह घटना स्कूल के संचालन के दौरान नहीं हुई, जिसके चलते एक बड़ा हादसा टल गया और किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
समय रहते टल गई एक बड़ी त्रासदी
कल्पना कीजिए कि अगर यही घटना स्कूल खुलने के बाद या बच्चों के कक्षा में बैठने के दौरान हुई होती, तो परिणाम कितने भयावह हो सकते थे। स्कूल के शिक्षक जब सुबह के समय कक्षा में पहुंचे, तो वहां मलबे का ढेर देखकर दंग रह गए। पट्टियों के टूटने की स्थिति को देखकर साफ पता चलता है कि छत का ढांचा काफी समय से जर्जर अवस्था में था। यह महज एक संयोग रहा कि जिस समय ये पट्टियां गिरीं, उस समय स्कूल में कोई भी विद्यार्थी या स्टाफ सदस्य मौजूद नहीं था। यदि विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य चल रहा होता, तो कई मासूम बच्चे इस मलबे के नीचे दबकर गंभीर रूप से घायल हो सकते थे या जान भी जा सकती थी।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा और लिया बड़ा फैसला
जैसे ही तोलियासर गांव के निवासियों को इस घटना की जानकारी मिली, आक्रोश की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण और विद्यार्थी के अभिभावक स्कूल परिसर में पहुंच गए। स्कूल प्रशासन और स्थानीय शिक्षा विभाग के प्रति भारी नाराजगी व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भवन के अधिकांश कमरे देखरेख के अभाव में पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि छतें इतनी कमजोर हो गई हैं कि वे कभी भी धराशायी हो सकती हैं।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित ग्रामीणों ने एक कड़ा फैसला लेते हुए स्कूल पहुंचे सभी छात्र-छात्राओं को बिना कक्षा में बिठाए ही वापस उनके घर भेज दिया। उनका स्पष्ट कहना है कि वे किसी भी हाल में अपने बच्चों की जान जोखिम में नहीं डालेंगे।
प्रशासन से सुरक्षा की लिखित गारंटी की मांग
ग्रामीणों ने विभाग के समक्ष स्पष्ट मांग रखी है कि जब तक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर जर्जर कमरों और क्षतिग्रस्त छतों की पूरी तरह मरम्मत नहीं करवाते, तब तक स्कूल का संचालन नहीं होगा। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें विद्यालय भवन की सुरक्षा के संबंध में लिखित आश्वासन और गारंटी दी जाए। इस घटना ने शिक्षा विभाग के उन दावों की भी पोल खोल दी है, जिनमें वे स्कूल भवनों को बच्चों के लिए पूरी तरह सुरक्षित होने की बात करते हैं। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है और स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ रहा है कि वे जल्द से जल्द स्कूल की सुध लें ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो और उन्हें सुरक्षित माहौल मिल सके।
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