राम मंदिर मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी से जुड़े विवादित मामले में कानूनी प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। ताजा अपडेट के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए चंपत राय का बयान दर्ज कर लिया है। हालांकि, पुलिस की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि अभी तक केवल बयान दर्ज किए गए हैं और विस्तृत पूछताछ की प्रक्रिया शुरू होनी बाकी है। ये बयान एक गवाह के तौर पर दर्ज किए गए हैं, जो जांच का एक हिस्सा है।
जांच का दायरा और प्रक्रिया
पुलिस सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले की तह तक पहुंचने के लिए लगभग 140 लोगों के बयान दर्ज किए जाने की योजना है। इस कतार में अब अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जिनके बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं। इससे पहले चर्चाएं थीं कि अयोध्या पुलिस चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा को नोटिस भेज सकती है। माना जा रहा है कि एसआईटी की तर्ज पर ही अयोध्या पुलिस भी इन सभी व्यक्तियों से पूछताछ करेगी ताकि जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा सके। चंपत राय श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे हैं, जबकि अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य रहे हैं। गोपाल राव का भी ट्रस्ट के साथ सीधा जुड़ाव है। जांच के अगले चरणों में दान पेटी की गिनती करने वाले कर्मचारी, बैंक तक राशि ले जाने वाले कर्मी, बैंक अधिकारी और सुरक्षा में तैनात गार्डों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे।
छापेमारी में मिले ठोस सबूत
जांच के दौरान अयोध्या पुलिस ने रविवार को कुल 10 अलग-अलग स्थानों पर बड़ी छापेमारी की। यह कार्रवाई करीब 6 से 8 घंटे तक जारी रही। छापेमारी के बाद पुलिस ने कई आरोपियों के परिवार के सदस्यों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। इस तलाशी अभियान के दौरान पुलिस के हाथ अहम सबूत लगे हैं। बरामदगी में कुछ नकद राशि, आभूषण, संपत्तियों के रजिस्ट्री एग्रीमेंट, बैंक पासबुक और गहनों की खरीद के बिल शामिल हैं। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कई नई संपत्तियां खरीदी हैं, जो उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज कराई थीं। पुलिस इन संपत्तियों के स्रोत की भी गहन जांच कर रही है। मामले में पहले से गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों को आज अदालत में पेश किया जाएगा, जहां पुलिस उन्हें रिमांड पर लेने का प्रयास करेगी ताकि मामले के अन्य पहलुओं का खुलासा हो सके।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
इस पूरे प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें चंदा चोरी की घटना की सीबीआई की एसआईटी के माध्यम से अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई करने से स्पष्ट इनकार कर दिया है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस मामले में अभी जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है और इसे छुट्टियों के बाद किसी रेगुलर बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है। अब सभी की नजरें पुलिस की अगली कार्रवाई और अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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