राम मंदिर चंदा चोरी: पवन पांडेय ने बताया कैसे अखिलेश यादव को सबसे पहले लगी थी भनक

अयोध्या राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले में सपा नेता पवन पांडेय ने बड़ा दावा किया है कि इस गड़बड़ी की जानकारी सबसे पहले अखिलेश यादव को मिली थी। उन्होंने चोरी के पीछे पैसों के बंटवारे को लेकर मचे विवाद को मुख्य कारण बताया है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर गरमाई सियासत

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे को लेकर हुई चोरी की घटना ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा इस विषय को सार्वजनिक मंचों पर उठाए जाने के बाद से ही सरकार और विपक्ष के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है। भाजपा लगातार यह सवाल पूछ रही है कि आखिर अखिलेश यादव को मंदिर के भीतर हो रही इस चोरी की जानकारी इतनी जल्दी कैसे मिल गई। इस पूरे विवाद के बीच अब सपा नेता तेज नारायण पांडेय, जिन्हें पवन पांडेय के नाम से जाना जाता है, ने एक बड़ा खुलासा किया है।

अखिलेश यादव को कैसे मिली पहली जानकारी

एक हालिया पॉडकास्ट के दौरान पवन पांडेय ने दावा किया कि चंदा चोरी की सूचना अखिलेश यादव को बहुत पहले ही मिल चुकी थी। उन्होंने बताया कि सपा मुखिया ने स्वयं उन्हें फोन करके इस गड़बड़ी के बारे में अवगत कराया था। पवन पांडेय के अनुसार, जब अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से राम मंदिर में चंदा चोरी का मुद्दा जोर शोर से उठाया, तभी सरकार की नींद खुली और मामले में जांच पड़ताल की प्रक्रिया शुरू की गई। उनके दावों के मुताबिक, भगवान राम ने स्वयं इस पूरे सच को सामने लाने के लिए अखिलेश यादव को चुना था।

पैसे के बंटवारे से हुआ चोरी का खुलासा

पवन पांडेय ने चोरी के उजागर होने के पीछे की कहानी बताते हुए कहा कि मंदिर में चढ़ावा गिनने वाले लोगों के बीच पैसों की हिस्सेदारी को लेकर विवाद हो गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि चोरी में शामिल लोग आपस में ही लूट के माल के बंटवारे को लेकर भिड़ गए, जिसकी वजह से यह पूरा मामला धीरे-धीरे बाहर निकलकर सामने आ गया। उन्होंने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि राम मंदिर में आने वाले दान में नकदी के अलावा चांदी और आभूषणों को भी सुनियोजित तरीके से गायब किया जा रहा था।

चंपत राय पर साधा सीधा निशाना

पवन पांडेय ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों को लेकर तीखे हमले किए। उन्होंने दावा किया कि मंदिर परिसर में जो कुछ भी हो रहा है, उसकी पूरी जिम्मेदारी शीर्ष प्रबंधन की है। पवन पांडेय ने पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव पर निशाना साधते हुए कहा कि चंपत राय की मर्जी के बिना ट्रस्ट में पत्ता तक नहीं हिलता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह चोरी केवल हाल के दिनों की नहीं है, बल्कि लंबे समय से चढ़ावे की राशि और कीमती वस्तुओं को दबाया जा रहा था।

एसआईटी की जांच पर जताया अविश्वास

राम मंदिर चंदा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी एसआईटी पर भी पवन पांडेय ने सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस जांच प्रक्रिया पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। उनका तर्क है कि राम मंदिर ट्रस्ट स्वयं ही इस मामले में शिकायतकर्ता है और उसे ही रिपोर्ट सौंपनी है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर गंभीर संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि जिस संस्था पर चोरी का आरोप है, उसी से निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना बेमानी है।

निष्कर्ष

अयोध्या के इस बहुचर्चित मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी भले ही हो गई हो, लेकिन सपा नेता के बयानों ने विवाद को और गहरा कर दिया है। जहां एक ओर सरकार अपनी जांच का बचाव कर रही है, वहीं विपक्ष इसे एक बड़ा घोटाला करार देते हुए सीधे तौर पर ट्रस्ट और सरकार के शीर्ष नेतृत्व को जिम्मेदार ठहरा रहा है। अब देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या खुलासे होते हैं।

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