मिर्जापुर में करोड़ों की लागत से बना ओवरब्रिज पहली बारिश में ही धंसा, निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

मिर्जापुर जिले में 43 करोड़ रुपये की लागत से तैयार आमघाट रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच रोड पहली ही बारिश में धंस गई है, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया है और स्थानीय लोगों ने निर्माण में भारी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।

निर्माण कार्य की पोल खुली

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में विकास कार्यों की हकीकत उस समय सामने आ गई जब भारी बारिश के बाद हाल ही में बनकर तैयार हुआ आमघाट रेलवे ओवरब्रिज की एप्रोच रोड धंस गई। इस घटना ने प्रशासन द्वारा किए गए निर्माण कार्यों और उनकी गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, इस ओवरब्रिज का निर्माण करीब 43 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। पहली ही बारिश में एप्रोच रोड का हिस्सा पूरी तरह से नीचे बैठ जाने के कारण वहां से भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है। पुल के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय नागरिकों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात ठप

मिर्जापुर का यह आमघाट ओवरब्रिज शहर को रीवा-वाराणसी मार्ग से जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण जरिया है। इस पुल के निर्माण से पहले यहां रेलवे फाटक होने के कारण अक्सर भीषण जाम की स्थिति बनी रहती थी, जिससे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ता था। इस समस्या के समाधान के लिए ही शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे मंजूरी मिलने के बाद करीब 43 करोड़ 80 लाख रुपये के बजट से इस पुल को खड़ा किया गया था। यह मार्ग न केवल शहर की कनेक्टिविटी के लिए जरूरी है बल्कि यहां से 20 से भी अधिक गांवों के लोग रोजाना आवाजाही करते हैं। हालांकि, पुल बनकर तैयार होने के महज 4 महीने के भीतर ही सड़क का धंसना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा

पुल निर्माण के बाद से ही स्थानीय निवासियों को इसमें कई कमियां नजर आ रही थीं। स्थानीय निवासी राजन कुमार का कहना है कि पुल के निर्माण में बरती गई लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इतने बड़े बजट के बावजूद स्थिति बेहद खराब है। उन्होंने बताया कि पीडब्ल्यूडी विभाग ने फिलहाल भारी वाहनों को रोकने के लिए सीमेंट के पत्थर रख दिए हैं। राजन ने पास में बने एक पुराने पुल का उदाहरण देते हुए कहा कि वह पुल आज भी जस का तस बना हुआ है, जबकि नया बनाया गया पुल पहली बारिश भी नहीं झेल सका। ग्रामीणों का साफ आरोप है कि एप्रोच रोड बनाने के दौरान निर्धारित मानकों को ताक पर रखा गया है।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

स्थानीय नागरिक धीरज तिवारी ने बताया कि यह समस्या अचानक पैदा नहीं हुई, बल्कि निर्माण के बाद से ही सड़क धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो रही थी। उन्होंने दावा किया कि सुबह जब उन्होंने उस जगह को देखा था, तो वहां मिट्टी भरकर गड्ढों को पाटने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन शाम तक वह हिस्सा फिर से धंस गया। लोगों का कहना है कि पुल निर्माण में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जा सके। जनता का मानना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं की गई, तो भविष्य में और भी बड़ा हादसा हो सकता है।

प्रशासन का क्या है पक्ष

इस पूरे मामले पर सेतु निगम के सहायक अभियंता रियाज हुसैन ने सफाई दी है। उन्होंने बताया कि यह एप्रोच मार्ग जनवरी महीने में बनकर तैयार हुआ था और फरवरी से इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुल 43 करोड़ रुपये की लागत पुल के लिए थी, जबकि पहुंच मार्ग यानी एप्रोच रोड पर करीब 80 लाख रुपये खर्च किए गए थे। रियाज हुसैन के अनुसार, बरसात के कारण मिट्टी धंसने से मार्ग के सेटलमेंट में कुछ तकनीकी दिक्कतें आई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि अगले 8 से 10 दिनों के भीतर इस समस्या को दुरुस्त कर दिया जाएगा और मार्ग को पुनः यातायात के लिए सुरक्षित बना दिया जाएगा।

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