मानसून में ताजी सब्जियों के लिए घर पर शुरू करें किचन गार्डन, विशेषज्ञ से जानें टिप्स

जून का अंत किचन गार्डन शुरू करने का सबसे उपयुक्त समय है, जहां आप बिना केमिकल वाली सब्जियां उगाकर बाजार के महंगे खर्च से बच सकते हैं।

मानसून के अनुकूल समय का लाभ उठाएं

अगर आप यह चाहते हैं कि बरसात के पूरे सीजन में आपकी रसोई की थाली में ताजी, हरी-भरी और पूरी तरह से केमिकल मुक्त सब्जियां मौजूद रहें, तो अब देरी करने का कोई मतलब नहीं है। जून का महीना समाप्त होने को है और कृषि जानकारों की राय में यही वह सटीक समय है, जब किचन गार्डन की शुरुआत करना सबसे अधिक लाभकारी सिद्ध होता है। इस दौरान मौसम पूरी तरह से पौधों के विकास के लिए अनुकूल बन जाता है। चिलचिलाती गर्मी के बाद जैसे ही बारिश की पहली फुहारें पड़ती हैं, मिट्टी में प्राकृतिक नमी का संचार होता है, जिससे पौधों की जड़ें काफी तेजी से विकसित होती हैं। इस समय रोपित किए गए पौधे मानसून के दौरान शानदार विकास करते हैं और बहुत जल्द हरे-भरे होकर पैदावार देना प्रारंभ कर देते हैं। इसका सबसे बड़ा आर्थिक लाभ यह है कि बारिश के दिनों में अक्सर आसमान छूती सब्जियों की कीमतों से आपको राहत मिलती है और बाजार से खरीददारी करने की निर्भरता काफी कम हो जाती है।

कृषि विशेषज्ञ की सलाह

देवघर के कृषि विशेषज्ञ अम्बिका कुशवाहा ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मानसून के आगमन से ठीक पहले और जून के अंतिम सप्ताह के भीतर किचन गार्डन की रूपरेखा तैयार कर लेनी चाहिए। उनके सुझाव के अनुसार, इस समय पपीता, बैंगन, मिर्च और भिंडी जैसी प्रमुख मौसमी सब्जियों की बुवाई करना सबसे उत्तम माना जाता है। विशेषज्ञ के अनुसार, हालांकि इन पौधों को अपनी शुरुआती अवस्था में कुछ हद तक अतिरिक्त देखभाल और ध्यान की जरूरत होती है, लेकिन एक बार जब ये पौधे मिट्टी में अपनी पकड़ बना लेते हैं, तो ये कई महीनों तक लगातार फल प्रदान करते रहते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घर के छोटे से आंगन, छत की खाली जगह, बालकनी या घर के आसपास की किसी भी छोटी खाली जमीन पर इन्हें आसानी से उगाया जा सकता है। इनकी खेती में बहुत अधिक लागत भी नहीं आती है, जो इसे हर आम परिवार के लिए एक बेहतर विकल्प बनाता है।

जैविक खाद से बढ़ाएं पैदावार

अम्बिका कुशवाहा के अनुसार, किचन गार्डन की सफलता में खाद का बड़ा योगदान होता है। यदि मिट्टी तैयार करते समय उसमें गोबर की पुरानी सड़ी हुई खाद या जैविक कंपोस्ट खाद का उचित मिश्रण मिलाया जाए, तो पौधों की बढ़वार की गति और स्वास्थ्य दोनों ही बेहतर हो जाते हैं। बरसात के दौरान पौधों को प्रकृति की ओर से पर्याप्त पानी मिलता रहता है, जिसकी वजह से सिंचाई के लिए होने वाला अतिरिक्त खर्च भी शून्य के बराबर हो जाता है। माली या बागवानी करने वाले व्यक्ति को बस इतना ध्यान रखना है कि समय-समय पर पौधों की निराई-गुड़ाई करते रहें और थोड़ी देखभाल करें। यह छोटी-सी मेहनत पौधों को लंबे समय तक हरा-भरा बनाए रखती है और लगातार सब्जियां प्रदान करने के लिए प्रेरित करती है। यही कारण है कि वर्तमान समय में शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ गांवों में भी लोगों का रुझान किचन गार्डन की तरफ काफी तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

सेहत और बचत का दोहरा लाभ

आजकल बाजार में बिकने वाली अधिकतर सब्जियों में रासायनिक दवाओं और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में, यदि आप अपने घर के गार्डन में सब्जियां उगाते हैं, तो परिवार के सभी सदस्यों को ताजी, पौष्टिक और शत-प्रतिशत केमिकल से मुक्त सब्जियां प्राप्त होती हैं। यह न केवल स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से बेहतर है, बल्कि हर महीने सब्जियों पर खर्च होने वाले पारिवारिक बजट को भी काफी हद तक कम कर देता है। घर की उगाई हुई सब्जियां बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए पूरी तरह से सुरक्षित मानी जाती हैं।

पूरे मानसून रहेगी रसोई में हरियाली

कृषि विशेषज्ञ ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि जून बीतने का इंतजार करना उचित नहीं है। यदि आप अभी अपने किचन गार्डन में पौधों का रोपण कर देते हैं, तो पूरे मानसून के सीजन में आपका रसोईघर हरा-भरा बना रहेगा और थाली में ताजी सब्जियों की उपलब्धता कभी कम नहीं होगी। थोड़ी सी मेहनत, बुवाई का सही चयन और नियमित रखरखाव अपनाकर कोई भी परिवार अपने घर में सरलता से सब्जियों का उत्पादन कर सकता है। यह न केवल आपको एक स्वस्थ जीवनशैली की ओर ले जाएगा, बल्कि अच्छी-खासी बचत करने में भी आपकी मदद करेगा।

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