दशहरी के बाद बागों में पकती है 'डिंगा' किस्म, सहारनपुर का यह आम काटकर नहीं, चूसकर खाया जाता है

सहारनपुर के मैंगो बेल्ट में उगने वाली डिंगा किस्म को 'फ्रूटी मैंगो' कहा जाता है, क्योंकि इसे काटने की जरूरत नहीं पड़ती और इसे ऊपर से हल्का काटकर सीधे चूसकर खाया जाता है। यह आम दशहरी के बाद पेड़ पर ही पक जाता है।

सहारनपुर जनपद को मैंगो बेल्ट के नाम से पहचाना जाता है। यहां किसान आम की अनेक किस्में उगाते हैं, लेकिन इनमें एक ऐसी किस्म भी है जो खाने से ज्यादा फ्रूटी की तरह चूसने के लिए इस्तेमाल होती है। इस किस्म का नाम है डिंगा, जो आम की एक मशहूर वैरायटी है और लगभग हर क्षेत्र में आसानी से मिल जाती है। सहारनपुर के किसान भी इसे अपने बागों में लगाते हैं।

दशहरी के बाद पकता है यह आम

डिंगा किस्म दशहरी आम के बाद बाजार में आती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे अलग से पकाने की जरूरत नहीं पड़ती, यह पेड़ पर ही पक जाता है। इसे फ्रूटी मैंगो इसलिए कहा जाता है क्योंकि जहां लोग ज्यादातर आम काटकर खाना पसंद करते हैं, वहीं इस आम को काटने की आवश्यकता नहीं होती। इसे ऊपर से हल्का सा काटने के बाद आसानी से चूसकर खाया जा सकता है।

इस आम के भीतर लिक्विड की मात्रा अधिक होती है, इसी वजह से लोग इसे फ्रूटी मैंगो कहते हैं। इसका स्वाद बिल्कुल फ्रूटी जैसा ही होता है, फर्क सिर्फ इतना है कि यह पूरी तरह नेचुरल फ्रूटी जैसा स्वाद देता है। दाम की बात करें तो मंडी में इस आम की कीमत भी दोगुनी तक मिलती है।

काटकर नहीं, चूसकर खाया जाता है डिंगा

किसान भूपेंद्र चौहान ने बताया कि आम की यह वैरायटी पूरे देश में मशहूर है और इसका नाम डिंगा है। उन्होंने बताया कि पकने के बाद लगभग सभी आम मीठे हो जाते हैं और काटकर खाए जाते हैं, लेकिन यह इकलौता आम है जिसे चूसकर खाया जाता है। इस आम के भीतर पूरी तरह लिक्विड भरा होता है और यह बेहद प्रसिद्ध किस्म है जो हर जगह आसानी से उपलब्ध हो जाती है। हालांकि उनके पास इस किस्म का सिर्फ एक ही पेड़ है।

हम इसे फ्रूटी मैंगो भी कहते हैं। इसे बिल्कुल फ्रूटी की तरह इस्तेमाल किया जाता है, आप ऊपर से हल्का सा काटिए और फ्रूटी की तरह ही इसे पी सकते हैं। यह एक नेचुरल फ्रूटी है।

आकार, उत्पादन और स्वाद

आकार की बात करें तो यह दशहरी की तरह ही एवरेज साइज का होता है, जबकि बाजार में भी इसका अच्छा दाम मिलता है। भूपेंद्र चौहान ने बताया कि उनके पिताजी पिछले 50 साल से बागवानी करते आ रहे हैं और अब वे भी उनके साथ इस काम में जुटे हैं।

उन्होंने बताया कि एक सीजन में एक पेड़ से तीन से चार क्विंटल तक आम आसानी से निकल आता है। यह दशहरी आम के बाद तैयार होता है और इसका स्वाद बहुत बढ़िया रहता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यही है कि इसे अलग से पकाना नहीं पड़ता, यह पेड़ पर ही पक जाता है और इसका स्वाद नेचुरल फ्रूटी जैसा होता है।

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