सफलता की कहानी: जहानाबाद के देवकांत ने हादसे के बाद बदली किस्मत, चप्पल निर्माण से कमा रहे हैं लाखों

मुंबई में नौकरी करने वाले देवकांत पांडे एक दुर्घटना के कारण बेरोजगार हो गए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और उद्योग विभाग की सहायता से अपना खुद का चप्पल निर्माण का व्यवसाय शुरू किया। आज वे सालाना 5 लाख रुपये का टर्नओवर प्राप्त कर रहे हैं और दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं।

दुर्भाग्य बना सफलता की सीढ़ी

कहते हैं कि इंसान की असली पहचान विपरीत परिस्थितियों में ही होती है। जहानाबाद जिले के बभना निवासी देवकांत पांडे ने इस बात को अपने जीवन से सच कर दिखाया है। एक समय था जब वे मुंबई की एक निजी कंपनी में मोटी सैलरी वाली नौकरी कर रहे थे, लेकिन एक सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी की दिशा पूरी तरह बदल दी। आज देवकांत न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि कई अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। उनके उद्यम का सालाना टर्नओवर 5 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।

सड़क दुर्घटना ने बदली जिंदगी

देवकांत पांडे का जीवन सामान्य रूप से चल रहा था। वे मुंबई में मेहनत से काम कर रहे थे। एक बार वे अपने साले की शादी में शामिल होने के लिए मुंबई से अपने पैतृक घर जहानाबाद आए थे। दुर्भाग्य से, एक बाइक दुर्घटना के दौरान उनका पैर बुरी तरह जख्मी हो गया। इस गंभीर चोट से उभरने में उन्हें लगभग 6 महीने का लंबा समय लग गया। जब वे स्वस्थ होकर वापस अपनी कंपनी में पहुंचे, तो वहां के प्रबंधन ने उन्हें काम पर रखने से साफ इनकार कर दिया। अचानक आई इस बेरोजगारी ने उन्हें गहरे संकट में डाल दिया था।

प्रेरणा का जरिया बनी एक छोटी सी मुलाकात

नौकरी जाने के बाद देवकांत काफी समय तक हताश और खाली बैठे रहे। इसी बीच एक दिन वे अपने किसी रिश्तेदार के घर गए। वहां उन्होंने स्लीपर यानी चप्पल बनाने का काम होते देखा। यह देखकर उनके मन में कुछ नया करने की जिज्ञासा पैदा हुई। उन्होंने सोचा कि क्या वे भी ऐसा कोई काम अपने गांव में शुरू कर सकते हैं? घर लौटने के बाद उन्होंने इस व्यवसाय की बारीकियों को समझने का प्रयास शुरू किया, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती पूंजी की थी।

सरकारी सहायता से मिला नया मुकाम

व्यवसाय शुरू करने के लिए धन की कमी के बीच उन्हें सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने जहानाबाद स्थित उद्योग विभाग के कार्यालय में संपर्क किया। वहां से उन्हें PMEGP योजना के तहत 10 लाख रुपये का लोन प्राप्त हुआ। इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्हें इसमें 2.5 लाख रुपये की सब्सिडी भी मिली। इस सरकारी मदद ने उनके हौसलों को उड़ान दी और उन्होंने साल 2022 में अपने घर के एक छोटे से कमरे से चप्पल बनाने की इकाई शुरू की।

व्यवसाय का विस्तार और कमाई का जरिया

अपनी मेहनत के दम पर देवकांत ने धीरे-धीरे बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। वर्तमान में उनके द्वारा बनाई गई चप्पलें केवल जहानाबाद जिले में ही नहीं, बल्कि पटना जिले तक में सप्लाई की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि वे थोक बाजार में 70 रुपये से 90 रुपये प्रति जोड़ा के हिसाब से चप्पलें उपलब्ध करा रहे हैं। जिले की लगभग 50 जगहों पर उनकी निर्मित चप्पलों की आपूर्ति हो रही है। इस काम से उन्हें सालाना 5 लाख रुपये का टर्नओवर मिल रहा है, जिससे उनका परिवार सुखपूर्वक जीवन यापन कर रहा है।

अन्य व्यवसायों में भी हाथ आजमाया

देवकांत केवल चप्पल निर्माण तक ही सीमित नहीं रहे। उन्होंने अपने कारोबार को और अधिक विविधतापूर्ण बनाने के लिए खाने वाले पत्तल, कटोरी और ग्लास बनाने की एक और मशीन भी सेटअप की है। शादी-ब्याह के सीजन में इन उत्पादों की मांग अधिक रहती है, जिससे उनकी अतिरिक्त कमाई भी सुनिश्चित होती है। देवकांत के इस छोटे से उद्यम में आज 5 लोग काम कर रहे हैं, जिससे न केवल उनका व्यवसाय फल-फूल रहा है, बल्कि पांच अन्य परिवारों को भी आजीविका का साधन मिल गया है। उनकी यह कहानी साबित करती है कि दृढ़ संकल्प के साथ की गई मेहनत असफलता को भी सफलता में बदल सकती है।

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