तैमूर और जेह को धर्म पर क्या सीख दे रहे हैं सैफ अली खान, बोले- ईश्वर एक है

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान ने अपने बच्चों की परवरिश और धार्मिक मान्यताओं को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि वे तैमूर और जहांगीर को कोई खास विचारधारा थोपने के बजाय प्रेम और खुले विचारों के साथ बड़ा कर रहे हैं।

परिवार की मिश्रित विरासत

सैफ अली खान का ताल्लुक एक ऐसे परिवार से है जहां धर्म और संस्कृति का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है। उनके पिता और प्रसिद्ध क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी इस्लाम को मानते थे, जबकि उनकी मां और दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर हिंदू धर्म से जुड़ी थीं। सैफ ने अपने जीवन में निजी अनुभवों और अपनी शादियों के माध्यम से विभिन्न धर्मों के करीब रहकर जीवन बिताया है। उन्होंने पहले अमृता सिंह और फिर साल 2012 में करीना कपूर से विवाह किया। एक ऐसे परिवेश में पले-बढ़े होने के कारण, सैफ के घर में शुरुआत से ही धर्मनिरपेक्ष माहौल रहा है, जहां घर के सदस्य दिवाली और क्रिसमस जैसे त्योहारों को एक समान उत्साह और खुशी के साथ मनाते हैं।

बच्चों को दी जाने वाली सीख

सैफ अली खान ने एक साक्षात्कार में बताया कि वे अपनी पत्नी करीना कपूर और अपने बेटों, तैमूर और जहांगीर, जिन्हें प्यार से जेह कहा जाता है, के साथ धर्म और आध्यात्मिकता जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा करते हैं। सैफ का कहना है कि वे खुद को बहुत धार्मिक व्यक्ति नहीं मानते हैं। इसलिए, वे अपने बच्चों पर किसी तरह की कट्टर या विशेष विचारधारा थोपने के बजाय उन्हें एक विस्तृत दृष्टिकोण देने में विश्वास रखते हैं। उन्हें उनकी मां शर्मिला टैगोर ने यह मूल्य सिखाया था कि ईश्वर एक है, बस उसे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है और उसे पूजने के तरीके भिन्न हो सकते हैं। यही खूबसूरत विचार वे आज अपने दोनों बच्चों को भी सिखा रहे हैं।

बचपन का एक मजेदार किस्सा

अपनी जीवनशैली और धर्म को लेकर बातचीत के दौरान सैफ ने अपने बचपन का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। वे उन दिनों एक ऐसे स्कूल में पढ़ते थे जहां दिन की शुरुआत चर्च में ईसाई प्रार्थना के साथ होती थी। सैफ ने बताया कि एक बार उन्होंने उस प्रार्थना में शामिल होने से बचने के लिए स्कूल प्रशासन से कह दिया कि वे दूसरे धर्म के हैं। इसके जवाब में स्कूल ने उनके लिए विशेष व्यवस्था करते हुए एक मौलवी को बुला लिया। इस घटना ने सैफ के उस बहाने को पूरी तरह नाकाम कर दिया और उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ।

तैमूर की समझदारी भरी बातें

सैफ अली खान ने अपने 9 साल के बेटे तैमूर के साथ हुई एक हालिया बातचीत का भी जिक्र किया। उन्होंने तैमूर से धर्म और काम करने के तरीके यानी 'मैथोडोलॉजी' के बीच का अंतर पूछा था। इस पर छोटे से तैमूर ने बहुत ही परिपक्वता के साथ जवाब दिया कि धर्म में हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं, जबकि काम करने के तरीके में प्रार्थना जैसी कोई चीज शामिल नहीं होती। सैफ अपने बेटे के इस तार्किक जवाब से बेहद खुश हुए और कहा कि वे खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें और करीना को एक जैसी खुली और आध्यात्मिक सोच मिली है, जिससे बच्चों का सही विकास हो रहा है।

इंटरफेथ मैरिज और समाज की चुनौतियां

धर्म और विवाह को लेकर सैफ और उनके परिवार को अक्सर विवादों का सामना करना पड़ा है। उनकी बहन सोहा अली खान ने भी पहले खुलासा किया था कि जब उन्होंने कुणाल खेमू से शादी की थी, तब उन्हें समाज की कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। उस समय लव जिहाद और घर वापसी जैसी बातें मीडिया की हेडलाइंस बनी थीं, जिसे सोहा ने काफी अजीब बताया था। सैफ की मां शर्मिला टैगोर को भी पटौदी साहब से शादी के वक्त अपना नाम बदलकर आयशा रखना पड़ा था। इन तमाम अनुभवों के बावजूद सैफ का मानना है कि धर्म का मुख्य उद्देश्य प्रेम और माफी है, जो वे अपने परिवार को सिखा रहे हैं।

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