अयोध्या राम मंदिर में दान की राशि की गिनती अब किस तरह हो रही है, कौन संभाल रहा है पूरी जिम्मेदारी

अयोध्या के राम मंदिर में दान की रकम में हुई गड़बड़ी के बाद अब सुरक्षा और गिनती की प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी और सीसीटीवी की कड़ी सुरक्षा के बीच अब रामलला के चरणों में अर्पित चढ़ावे का हिसाब-किताब रखा जा रहा है।

अयोध्या राम मंदिर में दान प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्था

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान के पैसों और बेशकीमती आभूषणों के गायब होने की खबरों ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में विशेष जांच दल की ओर से जांच जारी है और अब तक कई गिरफ्तारियां और छापेमारी की जा चुकी हैं। एफआईआर के साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है। इन तमाम घटनाओं के बीच भक्तों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या रामलला के मंदिर में दान की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है। भक्त बड़ी संख्या में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं और पूरी श्रद्धा के साथ दान भी कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन में नेतृत्व के स्तर पर आए बड़े बदलावों के बाद भी दान की गिनती का काम पूरी तरह से जारी है। ट्रस्ट के प्रमुख सदस्यों जैसे चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे और अन्य अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद अब मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा के मानकों को और अधिक कड़ा कर दिया है।

गोपाल राव की सीधी निगरानी में हो रही गिनती

सूत्रों के अनुसार, दानपात्रों को खोलने और उनसे निकली राशि को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी अब सीधे वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल राव ने अपने हाथों में ले ली है। पूर्व में हुई घटनाओं और गबन की शिकायतों को देखते हुए ट्रस्ट ने अब किसी भी बाहरी या तीसरे पक्ष पर भरोसा न करते हुए अपने आला अधिकारियों को सीधे काउंटर पर तैनात करने का निर्णय लिया है। दानपात्रों को अब बेहद कड़े सुरक्षा घेरे के बीच खोला जा रहा है और इस दौरान गोपाल राव स्वयं ग्राउंड जीरो पर उपस्थित रहकर पूरी प्रक्रिया की देखरेख कर रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भक्तों की आस्था बनी रहे और दान की गई हर एक पाई का हिसाब पारदर्शी तरीके से रखा जाए।

सीटवीवी कैमरे और हाईटेक निगरानी

मंदिर परिसर में नोटों की गिनती को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से हाई-टेक कर दिया गया है। संपूर्ण काउंटिंग एरिया और मंदिर परिसर को हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरों की निगरानी में रखा गया है। पुरानी व्यवस्था में मौजूद सभी प्रकार के ब्लाइंड स्पॉट्स को खत्म कर दिया गया है ताकि कोई भी कर्मी कैमरों की नजर से बचकर कोई गड़बड़ी न कर सके। नोटों की गिनती के दौरान केवल मंदिर के विश्वसनीय अधिकारियों के साथ-साथ संबंधित बैंक के विशेष रूप से अधिकृत और ईमानदार कर्मचारियों को ही शामिल किया जा रहा है। सुरक्षा की इस परत को इसलिए मजबूत किया गया है ताकि भविष्य में किसी भी तरह के आपराधिक गबन की संभावना को पूरी तरह से समाप्त किया जा सके।

नोटों की गिनती का नया तरीका

दानपात्र से निकली धनराशि को लेकर इस बार एक नई कार्यप्रणाली अपनाई जा रही है। मुख्य रूप से 100, 50 और 500 रुपये के नोटों को अलग-अलग श्रेणी में बांटकर उनकी व्यवस्थित गड्डियां तैयार की जा रही हैं। पहले जो खामियां सामने आई थीं, जिनमें 5 लाख के बड़े बंडलों के बीच नोटों को छिपाकर इधर-उधर किया जाता था, उस रास्ते को इस बार बंद कर दिया गया है। हर एक गड्डी की गिनती के बाद उसे तत्काल लेजर बुक और डिजिटल सिस्टम में दर्ज किया जा रहा है। ट्रस्ट का स्पष्ट प्रयास है कि चढ़ावे की हर एक राशि का हिसाब पारदर्शी रहे और किसी भी प्रकार का आर्थिक हेरफेर न हो सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  • दानपात्र किसके सामने खोले जा रहे हैं? दानपात्रों को खोलने की प्रक्रिया पूरी तरह से गोपाल राव और बैंक के अधिकृत कर्मचारियों की सीधी मौजूदगी में संपन्न की जा रही है।
  • सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं? गबन की हालिया घटनाओं के मद्देनजर इस बार पूरी गणना हाई-टेक सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हो रही है और इसकी लाइव मॉनिटरिंग के लिए उच्च अधिकारी तैनात किए गए हैं।
  • नोटों को कैसे व्यवस्थित किया जा रहा है? दान में मिले नोटों को अलग-अलग मूल्यवर्ग यानी 100, 50 और 500 रुपये के हिसाब से वर्गीकृत कर उनकी गड्डियां बनाई जा रही हैं और उनका डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा रहा है।

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