राम मंदिर चंदा गबन मामला: संतों का फूटा गुस्सा, बोले- ट्रस्ट को भंग कर भ्रष्टाचारियों को बाहर करें

अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित दान गबन मामले के बाद संत समाज ने मोर्चा खोल दिया है। पुलिस द्वारा आठ लोगों की गिरफ्तारी के बीच संतों ने ट्रस्ट को भंग करने और इसकी कार्यप्रणाली में बदलाव की मांग की है।

अयोध्या में संतों का आक्रोश

अयोध्या में राम मंदिर के नाम पर एकत्र किए गए दान में कथित गबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में पुलिस द्वारा आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद अब अयोध्या का संत समाज पूरी तरह से लामबंद हो गया है। संतों का स्पष्ट मानना है कि भगवान श्रीराम के चरणों में भक्तों द्वारा श्रद्धापूर्वक अर्पित किए गए धन में किसी भी तरह की अनियमितता एक अक्षम्य और बेहद गंभीर विषय है। इसे लेकर संतों ने न केवल निष्पक्ष जांच की मांग की है, बल्कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज पर भी तीखे सवाल उठाए हैं।

ट्रस्ट को भंग करने की उठी मांग

इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए अयोध्या के कई वरिष्ठ संतों ने मांग की है कि वर्तमान ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि हालिया घटनाओं ने देश और दुनिया भर में बसे करोड़ों राम भक्तों की धार्मिक भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है। संतों के अनुसार, इस पूरे विवाद ने ट्रस्ट की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, इसलिए अब समय आ गया है कि ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया जाए। संत समाज का कहना है कि मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए जिसमें भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह न हो और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

आंदोलनकारियों की उपेक्षा का आरोप

रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने वर्तमान ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि राम मंदिर निर्माण के लिए हुए लंबे आंदोलन में जिन लोगों ने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया और सक्रिय भूमिका निभाई, उन्हें इस ट्रस्ट में पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि मंदिर की देखरेख और व्यवस्था की जिम्मेदारी ऐसे लोगों के हाथों में होनी चाहिए जो आंदोलन के संघर्ष को समझते हों और जिनकी निष्ठा पर कोई सवाल न हो। उनके मुताबिक, वर्तमान ट्रस्ट में उन लोगों का अभाव है जो इस पवित्र कार्य को पूरी श्रद्धा और ईमानदारी के साथ संचालित कर सकें।

सनातन धर्म की गरिमा का सवाल

हनुमानगढ़ी के मुख्य पुजारी डॉ. देवेशाचार्य ने इस पूरे प्रकरण को सनातन धर्म और हिंदू समाज के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा भगवान की सेवा के लिए दान करते हैं, और यदि उस दान का उपयोग किसी गलत काम में होता है या उसमें हेराफेरी की जाती है, तो यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। डॉ. देवेशाचार्य ने जोर देकर कहा कि इस मामले की गहन और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।

व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव

डॉ. देवेशाचार्य ने मंदिर की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कुछ प्रमुख सुझाव भी दिए हैं:

  • मौजूदा ट्रस्ट को तुरंत प्रभाव से भंग किया जाए।
  • नए ट्रस्ट का गठन करते समय अयोध्या के प्रमुख संतों को प्राथमिकता दी जाए।
  • राम मंदिर आंदोलन में प्रत्यक्ष योगदान देने वाले संघर्षशील लोगों को शामिल किया जाए।
  • तीनों वैष्णव अखाड़ों के आधिकारिक प्रतिनिधियों को ट्रस्ट में उचित स्थान मिले।

संतों का मानना है कि यदि इन सुझावों को अमल में लाया जाता है, तो न केवल मंदिर की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी, बल्कि दुनिया भर के श्रद्धालुओं का ट्रस्ट पर भरोसा भी और अधिक मजबूत होगा। फिलहाल, संत समाज द्वारा उठाए गए इन कड़े कदमों ने अयोध्या के धार्मिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और ट्रस्ट की ओर से इस पर क्या रुख अपनाया जाता है और आगे की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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