विकास और जलवायु न्याय: सेशेल्स से प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल साउथ के लिए बुलंद की आवाज

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सेशेल्स की संसद को संबोधित करते हुए जलवायु परिवर्तन के असर पर चिंता जताई और विकसित देशों को निष्पक्ष जिम्मेदारी निभाने की याद दिलाई। उन्होंने ग्लोबल साउथ के हितों के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहराते हुए समुद्री और डिजिटल सहयोग पर जोर दिया।

ग्लोबल साउथ की मजबूती के लिए भारत का आह्वान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सेशेल्स यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय मंच से एक बड़ा संदेश दिया है। विक्टोरिया में सेशेल्स की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती पर चर्चा की और विकसित देशों को आईना दिखाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जलवायु कार्रवाई केवल तकनीकी बदलाव तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह निष्पक्षता, जिम्मेदारी और समता के सिद्धांतों पर टिकी होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ग्लोबल साउथ, खासकर छोटे द्वीपीय देश, जलवायु परिवर्तन का सबसे भारी खामियाजा भुगत रहे हैं, जबकि इस समस्या को खड़ा करने में उनकी भूमिका सबसे कम रही है।

समुद्री पारिस्थितिकी पर जलवायु परिवर्तन का असर

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि कैसे जलवायु परिवर्तन की मार आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि समुद्र के बढ़ते स्तर और बदलते मौसम के पैटर्न का सीधा असर तटवर्ती इलाकों और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, यह पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है कि जिन देशों ने पर्यावरण प्रदूषण में न्यूनतम योगदान दिया है, उन पर ही इसके विनाशकारी परिणामों का सबसे अधिक बोझ डाला जाए। प्रधानमंत्री ने यह साफ किया कि भारत इस विसंगति को दूर करने के लिए वैश्विक मंच पर ग्लोबल साउथ के हितों का प्रतिनिधित्व करना जारी रखेगा और इन विकासशील राष्ट्रों की चिंताओं को प्रमुखता से उठाएगा।

हिंद महासागर: दूरियां नहीं बल्कि जुड़ाव का प्रतीक

भारत और सेशेल्स के संबंधों की गहराई को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद हिंद महासागर क्षेत्र में उनकी पहली विदेश यात्रा सेशेल्स की ही थी। उन्होंने कहा कि उस समय भी उनका दृढ़ विश्वास था कि भारत की क्षेत्रीय रणनीति में सेशेल्स का स्थान अत्यंत विशेष है, और आज एक दशक बाद यह विश्वास और भी अधिक सुदृढ़ हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हिंद महासागर भौगोलिक रूप से भारत और सेशेल्स को अलग नहीं करता, बल्कि यह हम दोनों को आपस में जोड़ने का काम करता है। उन्होंने सेशेल्स को एक छोटे द्वीप राष्ट्र की परिभाषा से ऊपर उठकर एक बड़े समुद्री राष्ट्र के रूप में संबोधित किया, जिसका अधिकार क्षेत्र लगभग 14 लाख वर्ग किलोमीटर के विशाल समुद्री क्षेत्र में फैला हुआ है।

सहयोग के नए आयाम और डिजिटल नवाचार

प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए कई क्षेत्रों में सहयोग का प्रस्ताव रखा। उन्होंने मत्स्य पालन, समुद्री विज्ञान, तटीय प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और विस्तार देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और सेशेल्स मिलकर इन क्षेत्रों में बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने डिजिटल नवाचार को भविष्य की धुरी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने पूरी दुनिया को दिखाया है कि कैसे प्रौद्योगिकी के माध्यम से शासन को पारदर्शी बनाया जा सकता है, वित्तीय समावेशन को गति दी जा सकती है और करोड़ों नागरिकों तक सेवाएं आसानी से पहुंचाई जा सकती हैं। उन्होंने सेशेल्स को आश्वस्त किया कि जब भी देश अपनी डिजिटल यात्रा में आगे बढ़ेगा, भारत अपने अनुभवों और विशेषज्ञता को साझा करने के लिए सदैव तत्पर रहेगा।

भरोसेमंद साथी के रूप में भारत

अपने संबोधन के समापन में प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भारत सेशेल्स के साथ एक भरोसेमंद मित्र की तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल सेशेल्स की प्राथमिकताओं का सम्मान करता है, बल्कि उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर दिया कि भारत और सेशेल्स का साझा दृष्टिकोण एक ऐसे समावेशी विश्व के निर्माण का है, जहां हर राष्ट्र को विकास का समान अवसर मिले। यही वह भावना है जो पूरे ग्लोबल साउथ को एकजुट करती है, और भारत इसी विजन के साथ भविष्य में भी सेशेल्स के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा। रक्षा और सुरक्षा के मामले में भी दोनों देशों के बीच मजबूत आपसी सहयोग पर उन्होंने विशेष रूप से गर्व व्यक्त किया।

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