छतरपुर: टूटी पुलिया और बदहाल सड़क से किसान बेहाल, खरीफ की बोवनी पर मंडराया संकट

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में खराब सड़क और टूटी पुलिया के कारण सैकड़ों किसान अपनी फसलों की बुवाई को लेकर चिंतित हैं। स्थानीय किसानों का आरोप है कि सरपंच उनकी समस्याओं को अनसुना कर रहे हैं और फोन तक नहीं उठाते हैं।

मानसून की आहट और किसानों की चिंता

मध्य प्रदेश में मानसून ने दस्तक दे दी है और किसान भाई खरीफ की फसल की तैयारी में जुट गए हैं। लेकिन छतरपुर जिले के राजनगर तहसील अंतर्गत आने वाले सूरजपुरा और बराखेरा जैसे कई गांवों के किसान इन दिनों एक बड़ी मुसीबत का सामना कर रहे हैं। यहां खेतों तक पहुंचने वाला एकमात्र रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है। सड़क की स्थिति खराब है और मुख्य पुलिया टूट चुकी है, जिसके कारण सैकड़ों किसान परिवार अपनी खेती को लेकर गहरे संकट में हैं।

सड़क और पुलिया की बदहाली से थमी रफ्तार

किसानों का कहना है कि अगर समय रहते इस रास्ते को दुरुस्त नहीं किया गया, तो बारिश शुरू होते ही स्थिति और भी भयावह हो जाएगी। स्थिति यह है कि ट्रैक्टर और बैलगाड़ी जैसे जरूरी कृषि वाहन खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्थानीय निवासी प्रीतम कुशवाहा के अनुसार, लगभग 10 गांवों के किसान परिवारों के खेत इसी रास्ते से जुड़े हैं। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यह रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। प्रीतम ने बताया कि रेलवे निर्माण में लगे भारी ट्रकों और डंपरों के लगातार गुजरने के कारण यह पुलिया टूट गई है, जिससे आवागमन के सभी साधन ठप पड़ गए हैं।

बुवाई के समय पर खड़ी हुई चुनौती

बराखेरा गांव के किसान संजू गुप्ता ने बताया कि सिर्फ उनके गांव के ही 50 किसान परिवार हर रोज इसी रास्ते का उपयोग अपने खेतों तक जाने के लिए करते हैं। इन किसानों ने अपनी जमीन को जोतकर बुवाई के लिए तैयार कर लिया है, लेकिन टूटी पुलिया अब उनकी सबसे बड़ी रुकावट बन गई है। किसानों को डर है कि यदि मानसून की पहली अच्छी बारिश हो गई, तो कीचड़ और पानी भरने के कारण ट्रैक्टर का गुजरना असंभव हो जाएगा। किसान कल्लू का कहना है कि पुलिया के आसपास के खेतों में भी फसल की बुवाई हो चुकी है, जिसके कारण ट्रैक्टर दूसरे के खेतों से होकर भी नहीं निकल सकते हैं। बारिश के मौसम में यह इकलौता रास्ता था, जो अब पूरी तरह बंद हो चुका है।

सरपंच पर लापरवाही के गंभीर आरोप

किसानों ने इस समस्या को लेकर कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि वे अपनी परेशानी लेकर बराखेरा के सरपंच नारायण दास पटेल के पास कई बार जा चुके हैं, लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। किसानों का दर्द बयां करते हुए कहना है कि सरपंच न तो उनका फोन उठाते हैं और न ही उनसे व्यक्तिगत रूप से मिलने को तैयार हैं। इन ट्रकों की आवाजाही ने न सिर्फ पुलिया को तोड़ा है, बल्कि कच्ची सड़क पर भी बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए हैं, जिससे पैदल चलना भी दूभर हो गया है।

सचिव ने दी सफाई

जब इस मामले पर बराखेरा के सचिव रमेश से जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके पास इस समस्या की कोई लिखित शिकायत नहीं थी और उन्हें मीडिया के माध्यम से ही इस गंभीर स्थिति का पता चला है। सचिव ने स्वीकार किया कि इलाके में रेलवे का निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके लिए मिट्टी ढोने वाले भारी ट्रकों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने माना कि इन भारी वाहनों के कारण ही रास्ते और पुलिया क्षतिग्रस्त हुए हैं। सचिव ने भरोसा दिलाया है कि जानकारी मिलने के बाद अब जल्द से जल्द पुलिया के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, बराखेरा के सरपंच नारायण दास पटेल से संपर्क करने के तमाम प्रयासों के बावजूद उनसे न तो कोई मुलाकात हो सकी और न ही उन्होंने फोन पर कोई जवाब दिया।

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