फर्रुखाबाद: सपा नेता पर 20 लाख की रंगदारी का आरोप, दुकानदारों ने लगाए पलायन के पोस्टर

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में दुकानदारों ने समाजवादी पार्टी के एक स्थानीय नेता पर अवैध वसूली का आरोप लगाया है। मांग पूरी न होने पर दुकानें तोड़े जाने के विरोध में दुकानदार पलायन की चेतावनी दे रहे हैं।

फतेहगढ़ में मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां फतेहगढ़ के रेलवे रोड पर अपना व्यापार करने वाले करीब दो दर्जन दुकानदारों ने समाजवादी पार्टी के नेता समीर यादव पर उत्पीड़न करने और जबरन वसूली का गंभीर इल्जाम लगाया है। दुकानदारों का कहना है कि नेताजी की मांगें पूरी न करने के कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि व्यथित दुकानदारों ने अब अपनी दुकानों पर 'पलायन' के पोस्टर चिपका दिए हैं, जिससे इलाके में भारी हड़कंप मच गया है।

रंगदारी और ध्वस्तीकरण का खेल

दुकानदारों ने आरोप लगाया है कि समाजवादी पार्टी के नेता समीर यादव ने उनसे 20 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि की अवैध मांग की थी। दुकानदारों का दावा है कि जब उन्होंने इस अवैध मांग को मानने से साफ इनकार कर दिया, तो नेताजी ने सत्ता और रसूख का इस्तेमाल किया। आरोप है कि समीर यादव ने लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के साथ मिलकर मिलीभगत की और बदले की भावना से उनकी दुकानों को गिराने की कार्रवाई शुरू करवा दी।

24 घंटे का मिला अल्टीमेटम

पीड़ित दुकानदारों का कहना है कि उन्हें प्रशासन की ओर से अत्यंत कठोर रुख का सामना करना पड़ रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने मुनादी करवाते हुए उन्हें अपनी दुकानें खाली करने के लिए मात्र 24 घंटे का समय दिया है। अचानक मिले इस नोटिस से दुकानदारों के होश उड़ गए हैं। अपनी रोजी-रोटी छिनते देख दुकानदारों ने विरोध स्वरूप अपनी दुकानों के बाहर पलायन के पोस्टर लगा दिए हैं। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को उत्पीड़न का एक बड़ा जरिया करार दिया है।

प्रशासन की चुप्पी और आगे की राह

इस पूरे मामले ने अब स्थानीय स्तर पर एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। जहां एक ओर दुकानदार न्याय की गुहार लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपी सपा नेता समीर यादव की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। लोग अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा या फिर पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई को ही अंतिम माना जाएगा। फिलहाल, यह घटनाक्रम फतेहगढ़ रेलवे रोड पर चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में भी इस बात की चर्चा है कि समीर यादव पर लगे ये आरोप समाजवादी पार्टी की छवि को सार्वजनिक तौर पर धूमिल कर सकते हैं। अब सबकी नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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