गुजरात में मानसून की देरी से बढ़ी चिंता, अच्छी बारिश के लिए शहर में हुआ पर्जन्य यज्ञ

गुजरात में मानसून के तय समय पर नहीं पहुंचने के बाद गर्मी और उमस से परेशान लोगों ने राहत पाने के लिए प्राचीन वैदिक परंपरा का सहारा लिया है। अहमदाबाद के वस्त्राल में भगवान वरुण देव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पर्जन्य यज्ञ का आयोजन किया गया।

मानसून की बेरुखी से गुजरात में बढ़ी बेचैनी

आमतौर पर गुजरात में मानसून का आगमन हर साल 12 से 15 जून के बीच हो जाता है, लेकिन इस बार स्थिति कुछ अलग है। जून का महीना समाप्त होने को है और अभी तक राज्य में मानसून की पहली बूंद नहीं गिरी है। समय पर बारिश न होने के कारण गुजरात की जनता भीषण गर्मी और असहनीय उमस का सामना करने के लिए मजबूर है। इस पानी की किल्लत से केवल इंसान ही नहीं, बल्कि बेजुबान पक्षी और पशु भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे हर तरफ चिंता का माहौल है।

अहमदाबाद में अनोखी प्रार्थना

इसी कठिन समय में अच्छी बारिश की कामना के लिए अहमदाबाद के वस्त्राल इलाके के निवासियों ने एक प्राचीन धार्मिक मार्ग चुना है। स्थानीय लोगों ने मिलकर 'पर्जन्य यज्ञ' का आयोजन किया। इस यज्ञ की सबसे खास बात यह रही कि इसमें शामिल लोगों ने तेज धूप के बीच पानी से भरे बड़े-बड़े बर्तनों में बैठकर पूजा-अर्चना की। लोगों की यह आस्था है कि इस प्रकार की पूजा से भगवान वरुण देव प्रसन्न होंगे और जल्द ही बारिश होगी। इस आयोजन की देखरेख गिरीश कुमार पंडित की अगुवाई में की गई।

क्या है पर्जन्य यज्ञ का महत्व

गिरीश कुमार पंडित ने इस अनुष्ठान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जब बारिश में देरी होती है, तब इस यज्ञ को करने की परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में ऋषि-मुनि राजाओं को अच्छी वर्षा के लिए पर्जन्य यज्ञ करने का परामर्श दिया करते थे। उनका मानना है कि यदि पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से प्रार्थना की जाए, तो बारिश निश्चित रूप से होती है। इस यज्ञ में पानी के बड़े बर्तनों के भीतर बैठकर भगवान से बारिश की गुहार लगाना मुख्य हिस्सा है।

स्थानीय लोगों ने जताई चिंता

यज्ञ में भाग लेने वाले अमित पांड्या ने बताया कि हर साल 12-13 जून के आसपास बारिश का सिलसिला शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार मानसून की भारी देरी ने सबको परेशान कर दिया है। उन्होंने कहा कि शास्त्रोक्त विधि का पालन करते हुए हमने यह यज्ञ और पूजन किया है ताकि सूखे जैसे हालात से बचा जा सके। वहीं, हिमांशु त्रिवेदी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जल संकट गहरा सकता है। उन्होंने कहा कि हमने वरुण देव से पूरे भारत में अच्छी बारिश और सभी के लिए सुख-शांति की प्रार्थना की है, ताकि पक्षी और जानवर भी पानी की कमी से न जूझें।

वेदों में पर्जन्य का अर्थ

बता दें कि 'पर्जन्य' शब्द का सीधा अर्थ वर्षा के देवता से जुड़ा है। वैदिक साहित्य में पर्जन्य को वर्षा लाने वाला मुख्य देवता माना गया है। ऋग्वेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद जैसे प्राचीन ग्रंथों में पर्जन्य देवता को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्रों और यज्ञों का विस्तृत उल्लेख मिलता है। यह यज्ञ मुख्य रूप से वर्षा की कामना करने और सूखे के संकट से राहत पाने के लिए सदियों से किए जाते रहे हैं।

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