मिडिल ईस्ट की राजनीति में नया मोड़
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने मिडिल ईस्ट की अस्थिर राजनीति में नई हलचल मचा दी है। ट्रंप का मानना है कि हिजबुल्लाह को नियंत्रित करने के लिए इजरायल पर निर्भर रहने के बजाय सीरिया को इस मोर्चे पर आगे लाना चाहिए। ट्रंप ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि वे उस तरीके से संतुष्ट नहीं हैं जिस तरह इजरायल हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उनका तर्क है कि इजरायल बहुत अधिक तबाही मचा रहा है और बिना बड़ी क्षति पहुंचाए भी इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
फॉक्स न्यूज पर ट्रंप का बड़ा खुलासा
21 जून को फॉक्स न्यूज को दिए गए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इजरायल जब भी हिजबुल्लाह के खिलाफ कोई कदम उठाता है, तो इमारतें गिरने लगती हैं और भारी तबाही होती है, जो उचित नहीं है। इसी कड़ी में उन्होंने सुझाव दिया कि अब इस काम की जिम्मेदारी सीरिया को सौंपी जानी चाहिए। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात को स्पष्ट नहीं किया कि सीरिया से उनकी अपेक्षा सैन्य कार्रवाई की है या फिर वे केवल कूटनीतिक और राजनीतिक स्तर पर सीरिया का उपयोग करना चाहते हैं।
पुराना सुझाव और कूटनीतिक दबाव
यह पहला मौका नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने सीरिया को इस रणनीति का हिस्सा बनाने की बात की है। इससे पहले 5 जून को एनबीसी के साथ बातचीत में भी उन्होंने इसी तरह के संकेत दिए थे। उन्होंने सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की प्रशंसा करते हुए कहा था कि अगर स्थिति की मांग हुई तो वे सीरिया से मदद लेना पसंद करेंगे। जी7 सम्मेलन के दौरान भी ट्रंप ने इजरायल को यह सलाह दी थी कि उन्हें हिजबुल्लाह के मुद्दे पर सीरियाई सरकार के साथ समन्वय बिठाना चाहिए।
रिपोर्टों के जरिए बढ़ती अटकलें
इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय गलियारों में काफी समय से चर्चा जारी है। मार्च में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट ने दावा किया था कि अमेरिका ने सीरिया पर लेबनान के पूर्वी हिस्से में अपनी सेना तैनात करने का दबाव डाला है, ताकि हिजबुल्लाह की ताकत को कम किया जा सके। हालांकि, इस खबर के सामने आते ही अमेरिकी दूत टॉम बैरक ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया। बैरक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका की तरफ से सीरिया पर लेबनान में सेना उतारने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया गया है।
सीरिया ने स्पष्ट किया अपना रुख
इन खबरों के बाद सीरियाई प्रशासन के भीतर भी मंथन शुरू हुआ। मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने देश के कई सशस्त्र समूहों के प्रमुखों के साथ बैठक की। इस बैठक में सर्वसम्मति से यह संदेश दिया गया कि सीरिया की लेबनान के अंदर सैन्य हस्तक्षेप करने की न तो कोई मंशा है और न ही वे ऐसा करना चाहते हैं। सीरिया ने लेबनान को भी भरोसा दिलाया है कि उनकी सेना किसी भी परिस्थिति में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार नहीं करेगी।
आर्थिक और राजनीतिक सहयोग पर जोर
सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने एक हालिया साक्षात्कार में ट्रंप के बयानों को नए सिरे से परिभाषित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रंप के कहने का अर्थ यह नहीं था कि सीरियाई सेना लेबनान में घुसपैठ करेगी। शरा ने कहा कि बातचीत का असली उद्देश्य यह है कि सीरिया क्षेत्र में स्थिरता लाने में किस तरह अपनी कूटनीतिक भूमिका निभा सकता है। उनका कहना है कि वे लेबनान की सरकारी व्यवस्था को मजबूत करना चाहते हैं, न कि सैन्य दखल देना। सीरिया का ध्यान फिलहाल आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर है।
हिजबुल्लाह से बातचीत की संभावना
सीरियाई राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ, तो उनकी सरकार हिजबुल्लाह सहित लेबनान के सभी राजनीतिक धड़ों के साथ संवाद करने के लिए तैयार है। हालांकि, यह एक कड़वा सच है कि सीरिया के गृहयुद्ध के दौरान हिजबुल्लाह की भागीदारी ने दोनों देशों के बीच गहरी खाई पैदा की है। इसके बावजूद, सीरियाई राष्ट्रपति का मानना है कि अगर राष्ट्रीय हित में बातचीत जरूरी है, तो वे इससे पीछे नहीं हटेंगे।
लेबनान को मिली राहत
सीरिया के इस रुख के बाद लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने राहत की सांस ली है। उन्होंने शरा के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि इससे यह साफ हो गया है कि लेबनान की संप्रभुता को कोई खतरा नहीं है और सीरिया के इरादे स्पष्ट हैं। हालांकि, दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की भविष्य की रणनीतियों में सीरिया को लेकर आखिर क्या रोडमैप तय होता है और क्या वाकई अमेरिका सीरिया के जरिए हिजबुल्लाह पर कोई बड़ा दबाव बनाने में सफल हो पाएगा।
https://hindi.news18.com/world/america-us-preparing-to-deal-with-lebanon-s-hezbollah-group-via-syria-10609904.html