स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले से स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। जिले के सोनाबाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उस समय अफरातफरी मच गई जब प्रसव के लिए पहुंची एक गर्भवती महिला को अस्पताल के मुख्य गेट पर ताला लटका मिला। स्वास्थ्य कर्मी मौके पर नदारद थे, जिसके चलते महिला को अस्पताल के बरामदे में ही बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस घटना ने क्षेत्र में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और रात के समय आपातकालीन स्थिति से निपटने के दावों पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
परिजनों का दर्दनाक अनुभव
महिला के परिजन सकाराम बघेल ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि वे अपने भांजे की पत्नी को प्रसव पीड़ा के दौरान इलाज के लिए सोनाबाल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उन्होंने कहा, 'हम जब अस्पताल पहुंचे तो मुख्य गेट बंद था और उस पर ताला लगा हुआ था। हमने स्वास्थ्य कर्मियों के क्वार्टर में भी जाकर देखा, लेकिन वहां भी सब बंद था। कोई विकल्प न होने के कारण बरामदे में ही प्रसव प्रक्रिया शुरू हो गई। स्थिति इतनी विकट थी कि बच्चे की नाल काटने के लिए हमें बाहर से दुकान से ब्लेड खरीदकर लाना पड़ा। स्टाफ आधे घंटे की देरी के बाद वहां पहुंचा।'
पति ने साझा की आपबीती
महिला के पति अंगेत कश्यप ने बताया कि वे अपनी पत्नी को सुरक्षित प्रसव के लिए उम्मीद के साथ अस्पताल लेकर आए थे, लेकिन उन्हें वहां कोई सुविधा नहीं मिली। अंगेत कश्यप के अनुसार, 'मेरी पत्नी की डिलीवरी होने वाली थी और हमने उसे समय पर सोनाबाल अस्पताल पहुंचाया था। अस्पताल के बाहर ताला लगा होने के कारण हमें खुले बरामदे में प्रसव कराना पड़ा। हालांकि, राहत की बात यह है कि जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं। नवजात शिशु का वजन 3 किलो है।'
प्रबंधन ने दी सफाई
अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सोनाबाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की एएनएम हिरमती साहू ने अपने बचाव में कहा, 'मैं बिल्कुल भी देरी से नहीं पहुंची थी। मैं उस समय भोजन कर रही थी और जैसे ही मुझे सूचना मिली, मैं अपना खाना छोड़कर तत्काल अस्पताल के लिए रवाना हो गई। अस्पताल में रात के समय गार्ड ड्यूटी पर तैनात रहते हैं और वे वहीं सोते भी हैं। जब मैं पहुंची, तो मैंने ही बच्चे की नाल काटी थी। मेरा घर अस्पताल के पास ही है और मुझे जब भी कॉल आता है, मैं बिना किसी देरी के पहुंच जाती हूं।'
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर विवाद
इस पूरी घटना ने कोंडागांव जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में रात के समय उपलब्ध होने वाली मेडिकल सुविधाओं की हकीकत उजागर कर दी है। एक तरफ जहां सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की घटनाओं ने आम जनता में सरकारी अस्पतालों के प्रति भरोसा कम कर दिया है। फिलहाल, जच्चा और बच्चे के स्वस्थ होने की जानकारी के बाद परिजनों ने थोड़ी राहत की सांस ली है, लेकिन स्थानीय लोग स्वास्थ्य कर्मियों की इस लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस मामले में अब विभागीय जांच और स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।
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