समृद्ध पारिवारिक पृष्ठभूमि और संगीत का जुनून
आज 28 जून 2026 को बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार और गायक विशाल ददलानी का जन्मदिन है। उनका जन्म 28 जून 1973 को मुंबई के एक समृद्ध सिंधी परिवार में हुआ था। विशाल का बचपन बांद्रा के इलाके में बीता। उनके पिता मोती ददलानी एक सफल और नामचीन बिल्डर थे, जिसके कारण विशाल का शुरुआती जीवन काफी सुख-सुविधाओं के बीच गुजरा। एक रसूखदार व्यावसायिक परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद, विशाल का मन पारंपरिक बिजनेस की ओर नहीं, बल्कि संगीत की जादुई दुनिया की तरफ खिंचा चला गया।
संगीत की प्रेरणा और शिक्षा
विशाल ददलानी की शिक्षा-दीक्षा मुंबई के हिल ग्रेंज हाई स्कूल और एचआर कॉलेज से हुई है, जहाँ से उन्होंने वाणिज्य स्नातक की डिग्री हासिल की। संगीत की दुनिया में उनके पहले कदम अपनी मां रेशमा ददलानी की बदौलत पड़े। उनकी मां अक्सर घर में गुनगुनाती रहती थीं और उनकी मधुर आवाज ने ही विशाल को सुरों की पहचान कराई। संगीत का यही ककहरा आगे चलकर उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। व्यावसायिक पृष्ठभूमि के बावजूद, संगीत को अपनी अभिव्यक्ति का जरिया चुनकर उन्होंने अपने जीवन को एक नई और रचनात्मक दिशा दी।
पेंटाग्राम बैंड और स्वतंत्र संगीत का दौर
विशाल ददलानी के करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साल 1994 में आया, जब उन्होंने 'पेंटाग्राम' रॉक बैंड की स्थापना की। इस बैंड ने भारतीय स्वतंत्र संगीत यानी इंडी रॉक की तस्वीर बदल कर रख दी। बैंड ने वैकल्पिक रॉक से शुरुआत करते हुए इलेक्ट्रॉनिक रॉक की ओर कदम बढ़ाए और 1996 में अपना पहला एल्बम 'वी आर नॉट लिशनिंग' पेश किया। कारगिल युद्ध के समय, पेंटाग्राम ने गीतकार जावेद अख्तर और प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक शंकर महादेवन के साथ मिलकर 'द प्राइस ऑफ बुलेट' जैसा महत्वपूर्ण गीत रिकॉर्ड किया, जिसे भारत का पहला इंटरनेट आधारित गीत माना जाता है।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील होने के कारण उस दौरान कई टीवी चैनलों ने इसे प्रसारित करने से मना कर दिया था। इसके बावजूद, पेंटाग्राम की लोकप्रियता बढ़ती गई और साल 2005 में यह प्रतिष्ठित 'ग्लास्टनबरी संगीत समारोह' में प्रदर्शन करने वाला पहला भारतीय बैंड बना। विशाल ददलानी ने स्वतंत्र संगीत को आगे बढ़ाने के लिए 2002 में विजय नायर के साथ मिलकर 'ओनली मच लाउडर' (ओएमएल) की शुरुआत की। इतना ही नहीं, साल 2015 में उन्होंने अपना खुद का लेबल 'वीएलटी' यानी 'विशाल लाइक दिस' भी लॉन्च किया।
विशाल-शेखर की जादुई जोड़ी
साल 1999 में विशाल की मुलाकात शेखर रवजियानी से हुई और यहीं से 'विशाल-शेखर' की मशहूर जोड़ी का आगाज हुआ। उन्होंने आधुनिक तकनीक और नए संगीत के ढांचे को बॉलीवुड में पिरोया। फिल्म 'झंकार बीट्स' (2003) की जबरदस्त कामयाबी ने उन्हें बॉलीवुड की मुख्यधारा में लाकर खड़ा कर दिया, जिसके लिए उन्हें आरडी बर्मन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
पिछले दो दशकों में इस जोड़ी ने 'ओम शांति ओम' (2007) और 'टाइगर जिंदा है' (2017) जैसी कई हिट फिल्मों में अपनी संगीत कला का जादू बिखेरा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम किया है, जिसमें इमोजेन हीप, डिप्लो और द वैम्प्स जैसे बड़े कलाकारों के साथ सहयोग शामिल है, जिससे भारतीय संगीत की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत हुई है।
लोकप्रिय गानों की लंबी फेहरिस्त
विशाल ददलानी के करियर के चर्चित गीतों की सूची बहुत लंबी है। इनमें 'अजब सी' (ओम शांति ओम), 'जी ले जरा' (तलाश), 'शीला की जवानी' (तीस मार खां), 'छम्मक छल्लो' (रा.वन), 'जय जय शिवशंकर' (वॉर), 'घुंघरू' (वॉर), 'झूमे जो पठान' (पठान), 'बेबी को बेस पसंद है' (सुल्तान), 'बिन तेरे' (आई हेट लव स्टोरीज़) और 'बॉयज आर बैक' (तारा रम पम) जैसे गाने शामिल हैं, जो आज भी दर्शकों की जुबान पर हैं।
निजी जीवन और वर्तमान सफर
विशाल ददलानी का निजी जीवन भी चर्चाओं में रहा है। साल 1999 में उन्होंने प्रियाली कपूर से शादी की थी, लेकिन साल 2017 में आपसी सहमति से दोनों अलग हो गए। हालांकि, अलगाव के बावजूद दोनों परिवारों के बीच आज भी रिश्ते सामान्य और सौहार्दपूर्ण हैं। 53 वर्षीय विशाल ददलानी वर्तमान में सिंगिंग रियलिटी शो 'इंडियन आइडल 16' में जज के तौर पर नजर आ रहे हैं। उन्होंने 'इंडियन आइडल' के सीजन 10 (2018) से जज के रूप में अपना सफर शुरू किया था और बीच में कुछ ब्रेक लेने के बाद वे आज भी इस शो का अहम हिस्सा हैं। साथ ही, वे अपने पार्टनर शेखर रवजियानी के साथ देश और दुनिया भर में लाइव कॉन्सर्ट करने में व्यस्त रहते हैं।
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