चतुर्दशी तिथि पर कल इस दिशा में यात्रा करने से बचें, शुभ कार्यों के लिए मिलेगा केवल 40 मिनट का विशेष समय

28 जून 2026 को रविवार के दिन चतुर्दशी तिथि पर विशेष दिशाशूल का प्रभाव रहेगा, इसलिए यात्रा के दौरान सावधानी बरतें। इस दिन कई शुभ योगों का मिलन हो रहा है, लेकिन महत्वपूर्ण कार्यों के लिए मुहूर्त का समय सीमित है।

28 जून 2026: रविवार के दिन का पंचांग और महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, 28 जून 2026, दिन रविवार को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं में किसी भी बड़े निर्णय, पूजा-पाठ या यात्रा से पहले पंचांग की गणना को देखना बेहद अनिवार्य माना जाता है। पंचांग मुख्य रूप से सूर्य, चंद्रमा और विभिन्न ग्रहों की बदलती स्थितियों पर आधारित होता है। कल के दिन की ग्रह-दशाओं के अनुसार कई ऐसे संयोग बन रहे हैं जो सामान्य दिनों की तुलना में अधिक प्रभावशाली हैं। रविवार के दिन चार बड़े शुभ योगों का एक साथ निर्माण हो रहा है, जो इस दिन की ऊर्जा को विशेष बनाते हैं।

चतुर्दशी तिथि और प्रमुख समय सारणी

रविवार को ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि रात 3:06 बजे तक प्रभावी रहेगी। धार्मिक दृष्टि से यह तिथि पितृ कार्य और मोक्ष की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। चतुर्दशी तिथि के समापन के बाद पूर्णिमा तिथि का आरंभ होगा। दिन के विशेष समय की बात करें तो सूर्योदय सुबह 5:47 बजे और सूर्यास्त शाम 7:12 बजे होगा। इसके अलावा, चंद्रमा का उदय शाम 6:11 बजे होगा और चंद्र अस्त सुबह 4:47 बजे होगा। यदि हम शुभ कालों की बात करें, तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:11 बजे से लेकर 4:59 बजे तक बना रहेगा, जबकि अमृत काल का समय शाम 05:34 बजे से शुरू होकर शाम 07:10 बजे तक रहेगा।

बन रहे हैं विशेष शुभ योग

कल के दिन ग्रहों के प्रभाव से सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बना हुआ है, जो कार्य सिद्धि के लिए उत्तम माने जाते हैं। इसके साथ ही ‘शुभ’ योग की सक्रियता रात 12:59 बजे तक बनी रहेगी, जिसके बाद ‘शुक्ल’ योग की शुरुआत हो जाएगी। इन योगों के प्रभाव में किए गए धार्मिक अनुष्ठान या नए कार्यों की शुरुआत अत्यधिक फलदायी मानी जाती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूर्य इस समय आर्द्रा नक्षत्र में स्थित हैं, जिनके स्वामी राहु हैं। वहीं, चंद्रमा दोपहर तक ज्येष्ठा नक्षत्र में रहेंगे और उसके बाद मूल नक्षत्र में प्रवेश करेंगे।

शुभ कार्यों के लिए उत्तम समय

रविवार के दिन किसी भी अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ कार्य को करने के लिए अभिजित मुहूर्त सबसे शक्तिशाली माना जाता है। कल अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:56 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक रहेगा। यह समय दिन का मध्यकाल है और इसमें किसी भी नए काम का शुभारंभ, पूजा-अर्चना या बड़े निर्णयों को लेना श्रेष्ठ परिणाम देने वाला माना गया है। पंचांग के अनुसार इसी 40 मिनट के आसपास का समय कार्यों को पूरा करने के लिए सबसे अधिक अनुकूल रहेगा।

अशुभ समय और सावधानियां

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिन में कुछ ऐसे समय होते हैं जिन्हें शुभ कार्यों के लिए निषेध माना गया है। राहुकाल शाम 5:38 बजे से शाम 7:22 बजे के बीच रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल दोपहर 3:53 बजे से शाम 05:38 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 12:30 बजे से दोपहर 2:10 बजे तक चलेगा। इन समय अंतरालों के दौरान किसी भी प्रकार के नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे ज्योतिष शास्त्र में नकारात्मक प्रभाव वाला माना जाता है।

दिशाशूल का ध्यान रखें

पंचांग के अनुसार कल सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर कर रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के नियमों के तहत, रविवार और शुक्रवार के दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल लगता है। इसका अर्थ यह है कि रविवार को पश्चिम दिशा की ओर की गई यात्रा शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का कारण बन सकती है। यदि किसी अपरिहार्य कारणवश यात्रा करना आवश्यक ही हो, तो ज्योतिषीय उपाय के तौर पर घर से निकलने से पहले घी, दलिया या पान का सेवन करना शुभ माना जाता है। यात्रा के लिए प्रस्थान करने से पूर्व ईश्वर से अपनी कुशलता की प्रार्थना जरूर करें ताकि यात्रा सुखद और सुरक्षित बनी रहे।

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