ईरान-इजरायल युद्ध के माहौल में पहली बार आमने-सामने होंगे पीएम मोदी और मसूद पेजेशकियन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की किर्गिस्तान के बिश्केक में होने वाली बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच यह दोनों नेताओं की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात होगी।

बिश्केक में होगी अहम द्विपक्षीय वार्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंचे हुए हैं। इस वैश्विक मंच पर प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ उनकी मुलाकात तय की गई है। यह संवाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व आमने-सामने बैठकर चर्चा करेंगे।

युद्ध के साये में मुलाकात की टाइमिंग

क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और अस्थिरता को देखते हुए इस मुलाकात का समय काफी संवेदनशील और अहम है। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेशकियन युद्ध शुरू होने के बाद से ही फोन के जरिए लगातार संपर्क में बने हुए थे, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से यह उनकी पहली बैठक होगी। इससे पहले 30 जून को दोनों नेताओं के बीच टेलीफोन पर विस्तृत बातचीत हुई थी। उस दौरान राष्ट्रपति पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम एशिया के वर्तमान हालातों और ईरान की आगामी रणनीतिक योजना के बारे में विस्तार से अवगत कराया था।

वैश्विक स्तर पर टिकी हैं निगाहें

बिश्केक में आयोजित होने वाली इस द्विपक्षीय वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। कूटनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस आमने-सामने की बैठक में दोनों नेता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर देंगे, बल्कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाली के उपायों पर भी चर्चा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की ईरान के राष्ट्रपति के साथ यह बातचीत भारत की संतुलित विदेश नीति और क्षेत्रीय शांति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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