जिंक फॉस्फाइड क्या है और इसका इस्तेमाल क्यों होता है?
जिंक फॉस्फाइड एक गहरा ग्रे रंग का अकार्बनिक रासायनिक यौगिक है, जिसे आमतौर पर रोडेंटिसाइड यानी चूहों को मारने वाली दवा के रूप में पहचाना जाता है। इसका व्यावसायिक उपयोग मुख्य रूप से खेती, गोदामों और आवासीय परिसरों में हानिकारक कृंतकों से छुटकारा पाने के लिए किया जाता है। इसकी मारक क्षमता इतनी अधिक है कि इसे 'साइलेंट किलर' माना जाता है। मानव जीवन के लिए इसके अत्यधिक खतरनाक होने के कारण, सरकार ने इसके भंडारण, रखरखाव और सार्वजनिक बिक्री पर बेहद सख्त कानूनी और प्रशासनिक नियम बना रखे हैं।
मुंबई की घटना: मुहर्रम जुलूस में मौत का वितरण
हाल ही में मुंबई के भायखला इलाके में मुहर्रम के आशूरा जुलूस के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसमें दर्द निवारक दवा के नाम पर जिंक फॉस्फाइड के कैप्सूल लोगों को बांटे गए। जांच में पता चला कि एक व्यक्ति ने करीब 14000 से ज्यादा ऐसे कैप्सूल खरीदे थे और वह राहगीरों को यह कहकर बांट रहा था कि ये दर्द से राहत दिलाएंगे। प्रत्येक कैप्सूल में एक ग्राम जिंक फॉस्फाइड की घातक मात्रा मौजूद थी, जो किसी भी इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
शरीर के भीतर कैसे काम करता है यह जहर?
जब जिंक फॉस्फाइड मनुष्य के पेट में पहुंचता है, तो यह वहां मौजूद पेट के एसिड के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करता है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप फॉस्फीन गैस उत्पन्न होती है। यह गैस शरीर के लिए अत्यंत जहरीली होती है और सीधे तौर पर फेफड़े, हृदय, लीवर, किडनी और मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित करती है। यह रसायन शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन सोखने से रोक देता है, जिससे धीरे-धीरे मल्टी-ऑर्गन फेल्योर की स्थिति पैदा हो जाती है।
सेवन के बाद दिखने वाले खतरनाक लक्षण
जिंक फॉस्फाइड का सेवन करने पर व्यक्ति को निम्नलिखित गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:
- लगातार उल्टी होना और जी मिचलाना।
- पेट के ऊपरी हिस्से में असहनीय दर्द होना।
- मुंह या उल्टी से लहसुन जैसी तीखी और अजीब गंध आना।
- अत्यधिक कमजोरी महसूस करना और चक्कर आना।
- शरीर से बहुत अधिक पसीना निकलना।
अंगों पर विनाशकारी प्रभाव
यह जहर शरीर की पूरी कार्यप्रणाली को तहस-नहस कर देता है। इसके प्रभाव से ब्लड प्रेशर तेजी से नीचे गिर सकता है, हृदय की धड़कन पूरी तरह अनियमित हो सकती है और सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगती है। यदि समय पर उपचार न मिले, तो शरीर के कई अंग एक साथ काम करना बंद कर देते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में मल्टी-ऑर्गन फेल्योर कहा जाता है।
चिकित्सकीय जांच और आपातकालीन उपचार
चिकित्सक जिंक फॉस्फाइड पॉइजनिंग के मामलों में सबसे पहले मरीज के ब्लड प्रेशर, हृदय की स्थिति और ईसीजी रिपोर्ट की जांच करते हैं। इसके अलावा, खून में ऑक्सीजन के स्तर, किडनी फंक्शन टेस्ट और फेफड़ों की कार्यक्षमता का आकलन करना अनिवार्य होता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस जहर का कोई विशिष्ट एंटीडोट यानी काट उपलब्ध नहीं है। पीड़ित व्यक्ति को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना ही एकमात्र रास्ता है। इलाज के दौरान मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट और ऑक्सीजन की सख्त जरूरत पड़ सकती है, साथ ही हृदय और ब्लड प्रेशर को स्थिर करने के लिए लक्षणात्मक उपचार दिया जाता है। इस जहर की छोटी सी मात्रा भी जानलेवा होती है, इसलिए इसे मेडिकल इमरजेंसी की श्रेणी में रखा जाता है।
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