मिठाइयों की चमक और सेहत का संकट
धार्मिक नगरी उज्जैन अपनी आस्था और परंपराओं के साथ-साथ अपने स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए भी देश भर में प्रसिद्ध है। यहाँ की मिठाइयाँ न केवल स्वाद में लाजवाब होती हैं, बल्कि उनकी सजावट में इस्तेमाल होने वाला चांदी का वर्क उन्हें एक खास आकर्षण भी प्रदान करता है। हालांकि, अब इन मिठाइयों की सुंदरता पर ग्रहण लगने वाला है। प्रशासन ने अब मिठाइयों पर लगाए जाने वाले चांदी के वर्क के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की एक अहम पहल शुरू की है। इस फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य शहर में शुद्ध और सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
कलेक्टर का निर्देश और जागरूकता की मुहिम
हाल ही में प्रशासनिक संकुल में आयोजित खाद्य सुरक्षा विभाग की सलाहकार समिति की एक बैठक के दौरान कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस दिशा में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कलेक्टर ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों से साफ कहा कि वे मिठाई कारोबारियों और कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के साथ मिलकर विशेष बैठकें आयोजित करें। इन बैठकों का लक्ष्य दुकानदारों को खाद्य सुरक्षा मानकों और चांदी के वर्क से सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जागरूक करना है। कलेक्टर का स्पष्ट मानना है कि बाजार में मिलने वाले चांदी के वर्क की शुद्धता को लेकर हमेशा से संदेह रहा है, और मिलावटी वर्क का सेवन जनमानस के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
मिलावटखोरों पर नकेल की तैयारी
प्रशासन का लक्ष्य केवल चांदी के वर्क को बंद करना ही नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावट पर पूर्ण विराम लगाना भी है। कलेक्टर ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को यह निर्देश दिए हैं कि मिलावटी और नकली खाद्य उत्पादों के खिलाफ निरंतर जांच अभियान चलाए जाएं। अब यह जांच केवल त्योहारों के आसपास तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि साल भर बाजार की सघन निगरानी की जाएगी। इसके अलावा, स्कूलों में भी बच्चों को पौष्टिक आहार और सुरक्षित खानपान के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की योजना है।
नमूनों की जांच में विभाग का प्रदर्शन
खाद्य सुरक्षा विभाग के कामकाज की जानकारी देते हुए मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी बसंत दत्त शर्मा ने बताया कि विभाग ने निर्धारित लक्ष्यों से बढ़कर काम किया है। 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक विभाग ने 420 नमूनों का लक्ष्य रखा था, जिसके मुकाबले 513 नमूने लिए गए। यह कुल लक्ष्य का 122 प्रतिशत है। इसी प्रकार, 1 अप्रैल 2026 से 20 जून 2026 तक की संक्षिप्त अवधि में भी विभाग ने तत्परता दिखाते हुए 90 खाद्य नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है।
स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है नकली वर्क
चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो बाजार में बिकने वाले सस्ते और मिलावटी चांदी के वर्क में अक्सर एल्युमिनियम, शीशा और कैडमियम जैसी धातुओं का मिश्रण होता है। ये धातुएं शरीर के लिए अत्यंत घातक साबित हो सकती हैं। इनका नियमित सेवन करने से लिवर और किडनी पर बुरा असर पड़ने की प्रबल संभावना रहती है। यही नहीं, इनके कारण पेट से जुड़ी गंभीर समस्याएं, संक्रमण और अल्सर का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक इन रसायनों का सेवन करने से व्यक्ति के नर्वस सिस्टम और याददाश्त पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उज्जैन वासियों का मिला समर्थन
प्रशासन के इस फैसले की शहर के नागरिक जमकर सराहना कर रहे हैं। स्थानीय निवासी राजकुमार पासवनी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि शहर में मिठाइयों की विविधता अद्भुत है, लेकिन अक्सर लोग चांदी के वर्क वाली मिठाइयों की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं, जो केवल दिखावे के लिए होती हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन का यह निर्णय बेहद प्रशंसनीय है, क्योंकि अब मिठाइयों की दिखावटी चमक भले ही कम हो जाए, लेकिन आम लोगों को बिना मिलावट की शुद्ध और सुरक्षित मिठाइयां उपलब्ध हो सकेंगी। इस कदम से भविष्य में खाद्य गुणवत्ता में एक बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
https://hindi.news18.com/news/madhya-pradesh/ujjain-sweet-lovers-silver-leaf-being-adulterated-take-heed-you-could-fall-prey-illness-district-administration-local18-10607858.html