कहा जाता है कि अगर पूरे समर्पण के साथ मेहनत की जाए तो सफलता खुद रास्ता बना लेती है। ऋषिकेश की शताक्षी शर्मा की कहानी इसी बात को सच साबित करती है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित सम्मिलित राज्य सिविल/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा के परिणाम में उन्होंने पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) पद पर चयन प्राप्त किया है।
उनकी इस उपलब्धि के बाद पूरे ऋषिकेश क्षेत्र में खुशी की लहर है। सामान्य उत्तराखंड महिला श्रेणी में चयनित शताक्षी की यह जीत केवल एक परीक्षा का नतीजा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, संघर्ष और धैर्य की कहानी है।
दूसरे प्रयास में मिली कामयाबी
शताक्षी शर्मा ने बातचीत में बताया कि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी किसी मैराथन से कम नहीं होती। यह उनका दूसरा पीसीएस प्रयास था। उन्होंने वर्ष 2021 में पहली बार परीक्षा दी थी, लेकिन तब मेन्स में सफलता नहीं मिल पाई थी।
इसके बाद उन्होंने वर्ष 2023 में आरओ/एआरओ परीक्षा भी दी, जिसमें वह अंतिम कटऑफ से महज 1.5 अंकों के अंतर से चूक गई थीं। बार-बार असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी तैयारी को और पुख्ता करने में जुट गईं।
50 से 60 टेस्ट पेपर लिखकर किया अभ्यास
शताक्षी के अनुसार, वर्ष 2021 में उन्होंने पढ़ाई तो खूब की थी, लेकिन उत्तर लेखन और पेपर प्रैक्टिस उतनी नहीं हो पाई थी जितनी इस परीक्षा के लिए जरूरी होती है। नए परीक्षा पैटर्न में सामान्य अध्ययन के चार पेपरों के साथ-साथ उत्तराखंड से जुड़े दो अतिरिक्त पेपर भी शामिल थे।
इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस बार करीब 50 से 60 टेस्ट पेपर लिखे। उनका मानना है कि यही नियमित अभ्यास उनकी सफलता की एक बड़ी वजह बना। उन्होंने बताया कि उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि पीसीएम की रही है, फिर भी तैयारी के दौरान उन्होंने हर विषय को समान महत्व दिया। खासकर जीएस पेपर-2 का पाठ्यक्रम बेहद व्यापक था और इसमें करंट अफेयर्स का बड़ा हिस्सा शामिल था, जिसके लिए उन्हें लगातार जुटे रहना पड़ा।
मुश्किल हालात में मां ने दिया साथ
ऋषिकेश निवासी शताक्षी शर्मा की प्रारंभिक शिक्षा श्री भरत मंदिर पब्लिक स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पंडित ललित मोहन शर्मा पीजी कॉलेज, ऋषिकेश से पूरी की।
उन्होंने बताया कि वह एक लोअर-मिडिल क्लास परिवार से आती हैं और उनकी मां उसी स्कूल में निजी शिक्षिका हैं। शताक्षी अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपनी मां को देती हैं और कहती हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्हें परिवार का पूरा साथ मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन परिवारों का प्रशासनिक सेवाओं से सीधा जुड़ाव नहीं होता, वहां अक्सर सरकारी पदों, उनकी शक्तियों और महत्व के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं होती। ऐसे में सही मार्गदर्शन और जागरूकता भी सफलता की राह में अहम भूमिका निभाती है।
चोट के बावजूद नहीं रुकी तैयारी
अपने सफर को याद करते हुए शताक्षी ने बताया कि कॉलेज के तीसरे वर्ष में उन्होंने विक्रमशिला आईएएस कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया और वहां से प्रीलिम्स की तैयारी के लिए फाउंडेशन कोर्स किया। हालांकि मेन्स की तैयारी उन्होंने खुद से अध्ययन के जरिए की और कोचिंग की सामग्री का इस्तेमाल केवल संदर्भ के रूप में किया।
उन्होंने यह भी साझा किया कि एक दुर्घटना में पैर में चोट लगने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। कई बार असफलता और आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं भटकने दिया।
अभ्यर्थियों के लिए सुझाव
भविष्य के परीक्षार्थियों को सलाह देते हुए शताक्षी ने कहा कि इस समय उत्तराखंड पीसीएस का पाठ्यक्रम काफी हद तक यूपीएससी के अनुरूप हो चुका है, इसलिए दोनों के लिए अलग-अलग तैयारी करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, अध्ययन सामग्री अपनी सुविधा के अनुसार चुनी जा सकती है, लेकिन समय-समय पर नोट्स को नए तथ्यों और करंट अफेयर्स के साथ अपडेट करते रहना जरूरी है।
उत्तराखंड से जुड़े विषयों की तैयारी के लिए उन्होंने परीक्षा वाणी, बीएस नेगी, उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी की पुस्तकों और अजय रावत की किताबों को उपयोगी बताया।
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