अयोध्या के संत समाज को बड़ी क्षति
अयोध्या की विख्यात पीठ हनुमानगढ़ी से एक अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। हनुमानगढ़ी के प्रतिष्ठित महंत संत रामदास का निधन हो गया है। वे 85 वर्ष के थे और लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही अयोध्या के धार्मिक और संत जगत में शोक छा गया है।
महंत राजू दास ने दी जानकारी
महंत संत रामदास के निधन की जानकारी हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से साझा की है। उन्होंने अस्पताल की एक तस्वीर साझा करते हुए अत्यंत भावुक संदेश लिखा। उन्होंने बताया कि हमारे पूज्य गुरुदेव भगवान श्री श्री 1008 श्री महंत संत रामदास जी महाराज, जो पंचांग पट्टी उज्जैनिया हनुमानगढ़ी, अयोध्या धाम से संबंधित थे, उनका गोलोकवास हो गया है। महंत राजू दास ने बताया कि आज शाम 3 बजे एक शोभा यात्रा निकाली जाएगी और उसके बाद शाम 4 बजे सरयू तट स्थित नया घाट, जिसे कच्चा घाट भी कहा जाता है, पर पूरे वैदिक रीति रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने व्यक्त किया दुख
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत संत रामदास के निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा कि प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान प्रदान करें। ॐ शांति। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का महंत संत रामदास के प्रति विशेष लगाव था। वे जब भी अयोध्या के दौरे पर होते थे, तो महंत के आश्रम जाकर उनका आशीर्वाद लेना नहीं भूलते थे। मुख्यमंत्री अक्सर उन्हें रामनामा और गदा भेंट कर सम्मानित भी किया करते थे। उल्लेखनीय है कि महंत राजू दास उन्हीं के शिष्य हैं।
बीते 8 महीनों से चल रहे थे बीमार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महंत संत रामदास पिछले लगभग 8 महीनों से गंभीर रूप से बीमार थे। वे उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां से स्वास्थ्य लाभ लेने के बाद वे केवल तीन दिन पहले ही वापस अयोध्या लौटे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनकी मृत्यु की खबर से भक्तगण स्तब्ध हैं और उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है।
संत समाज में विशेष स्थान
उज्जैनिया पट्टी के महंत संत रामदास का अयोध्या के संत समाज में अत्यंत सम्मानजनक स्थान था। उनका जाना अयोध्या के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है। उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए दूर-दराज से संत और अनुयायी अयोध्या पहुंच रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में हनुमानगढ़ी की परंपराओं को आगे बढ़ाने का कार्य बखूबी किया गया था, जिसे उनके शिष्य महंत राजू दास और अन्य संत आगे बढ़ाएंगे।
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