राजस्थान की पारंपरिक रसोई का खास जायका
राजस्थान के धौलपुर जिले के ग्रामीण अंचलों में आज भी देसी खानपान का महत्व बरकरार है। जब चिलचिलाती गर्मी का मौसम आता है, तो यहाँ के लोग फास्ट फूड या बाजार में मिलने वाले पैकेट बंद खानों से दूर अपनी पुरानी और पारंपरिक डिश चदिया का लुत्फ उठाना पसंद करते हैं। यह डिश न केवल पेट को ठंडक पहुँचाती है, बल्कि इसका अनूठा स्वाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को अपना दीवाना बना देता है।
चदिया बनाने की सरल विधि
घर में चदिया बनाने की प्रक्रिया के बारे में गृहिणी प्रभा शर्मा विस्तार से जानकारी देती हैं। उनका कहना है कि इसे घर पर तैयार करना काफी सरल है और इसके लिए उपयोग की जाने वाली सामग्रियां भी हर रसोई में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
- सबसे पहले धोआ उड़द की दाल को अच्छी तरह साफ करके रात भर पानी में भिगोकर रखा जाता है।
- अगली सुबह भीगी हुई दाल को मिक्सी की मदद से बहुत बारीक पीस लिया जाता है।
- दाल का पेस्ट तैयार होने के बाद इसकी छोटी-छोटी गोल टिकियां बनाई जाती हैं, जिन्हें चदिया कहा जाता है।
- तैयार की गई चदिया के दोनों तरफ हींग का पानी अच्छी तरह लगाया जाता है, जिससे इसमें एक खास सुगंध और स्वाद आ जाता है।
- अंत में कढ़ाई में शुद्ध सरसों का तेल गर्म किया जाता है और चदिया को सुनहरा और कुरकुरा होने तक तला जाता है। जब ये पूरी तरह पक जाती हैं, तो इन्हें तेल से बाहर निकाल लिया जाता है।
ठंडा पानी और पुदीने का तालमेल
इस डिश को तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण चरण इसके लिए विशेष पानी बनाना है। एक बर्तन में ताजा पुदीना, हींग और स्वादानुसार नमक मिलाकर ठंडा पानी तैयार किया जाता है। तली हुई चदिया को इस तैयार पानी में डाल दिया जाता है और फिर बर्तन को कुछ समय के लिए फ्रिज में रख दिया जाता है। ठंडा होने के बाद इस डिश का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है। हींग और पुदीना दोनों ही पाचन में मदद करते हैं और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में सहायक होते हैं, जो इसे गर्मियों के लिए एक आदर्श भोजन बनाता है।
सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक
धौलपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में चदिया सिर्फ एक साधारण व्यंजन नहीं है, बल्कि यह वहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। पीढ़ियों से चली आ रही यह रेसिपी आज भी ग्रामीण थालियों की शोभा बढ़ाती है। लोग इसे बड़े शौक के साथ खाते और पीते हैं। आधुनिकता के इस दौर में जहां युवा फास्ट फूड की ओर आकर्षित हो रहे हैं, धौलपुर के लोग आज भी अपनी इस देसी विरासत को संजोए हुए हैं। इसकी सादगी और स्वास्थ्यवर्धक गुण ही इसे आज के दौर में भी इतना लोकप्रिय बनाए हुए हैं। जो भी एक बार इसका स्वाद चख लेता है, वह इसे बार-बार खाना पसंद करता है क्योंकि यह स्वाद और स्वास्थ्य का एक बेहतरीन संगम है।
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