ग्रेजुएशन के बाद बदली जीवन की दिशा
आज के दौर में जब ज्यादातर युवा अपनी डिग्री हासिल करने के बाद बड़े महानगरों की दौड़ में शामिल हो जाते हैं और नौकरी के लिए भटकते रहते हैं, पलामू जिले के खामडीह निवासी सोनू कुमार गुप्ता ने एक अलग और अनूठा रास्ता चुना है। ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने किसी दफ्तर में काम करने के बजाय अपने पुश्तैनी काम यानी खेती को ही अपना व्यवसाय बना लिया। उन्होंने न केवल पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़ा, बल्कि सब्जी उत्पादन के जरिए सफलता की एक नई कहानी लिखी है। उनकी यह मेहनत आज न सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को संवार रही है, बल्कि गांव के अन्य बेरोजगार युवाओं के लिए भी प्रेरणा की किरण बनकर उभरी है।
पिता के मार्गदर्शन से मिली सीख
सोनू कुमार गुप्ता ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में अपनी स्नातक की डिग्री पूरी की थी। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही वे अपने पिता के साथ खेतों में जाकर उनका हाथ बंटाते थे। यही वह दौर था जब उन्हें मिट्टी से जुड़ने और कृषि की बारीकियों को समझने का मौका मिला। उस समय उनके परिवार की निर्भरता मुख्य रूप से धान और गेहूं की पारंपरिक फसलों पर थी, लेकिन इन फसलों में मेहनत के अनुपात में बहुत कम मुनाफा मिल पा रहा था। इसी कमी को देखते हुए उन्होंने पढ़ाई खत्म होते ही पूरी तरह से सब्जी उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाने का साहसी निर्णय लिया।
सब्जी की खेती से संवरी आर्थिक स्थिति
खेती के अपने प्रयोगों के बारे में बात करते हुए सोनू ने बताया कि पहले उनका परिवार काफी आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। सीमित आमदनी के कारण घर की जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने अपनी रणनीति बदली और धान-गेहूं को छोड़कर मौसमी सब्जियों की खेती को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी एक से डेढ़ एकड़ भूमि पर करेला, कद्दू, खीरा, नेनुआ और झिंगी जैसी सब्जियों को उगाना शुरू किया। सालभर की निरंतर मेहनत और उचित देखभाल के चलते, आज वे उत्पादन की कुल लागत निकालने के बाद सालाना तीन से चार लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। इस आय ने उनके परिवार की तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है।
आधुनिक कृषि की ओर बढ़ते कदम
सोनू अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर कृषि में आधुनिक तकनीक को शामिल करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य अब ट्रिपल लेयर खेती के मॉडल को विकसित करने का है। उनका मानना है कि इस वैज्ञानिक तकनीक की मदद से एक ही जमीन के टुकड़े पर कई स्तरों पर अलग-अलग फसलें उगाई जा सकती हैं, जिससे कम संसाधन में उत्पादकता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है। उनका यह सपना है कि आने वाले समय में वे आधुनिक उपकरणों और बेहतर वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके अपने कृषि व्यवसाय का दायरा और अधिक विस्तारित करें।
सरकारी सहयोग और सोलर पंप की उम्मीद
सोनू ने यह भी साझा किया कि हालांकि उन्होंने अपने दम पर यह सफलता हासिल की है, लेकिन उन्हें अब तक किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सका है। यदि जिला प्रशासन या संबंधित विभाग से उन्हें मदद मिले, तो वे अपनी खेती की तकनीक को और अधिक आधुनिक बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में बिजली की अनियमित आपूर्ति सिंचाई के कार्यों में सबसे बड़ी बाधा है। फिलहाल वे सतही सिंचाई के जरिए काम चला रहे हैं, लेकिन अगर उन्हें सोलर पंप की सुविधा मिल जाए, तो सिंचाई का खर्च काफी कम हो जाएगा और सब्जियों की पैदावार को और अधिक ऊंचाई तक ले जाया जा सकेगा।
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