चीन से जुड़े तार और विवादित फंडिंग
भारत की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' पर सवाल खड़ा करने वाले संयुक्त राष्ट्र के एक्सपर्ट बेन सॉल अब खुद विवादों के घेरे में आ गए हैं। एक हालिया रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है कि उन्हें चीन सरकार की तरफ से 1.5 लाख डॉलर की भारी-भरकम धनराशि प्राप्त हुई थी। इस खुलासे के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके द्वारा दिए गए बयानों की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गए हैं।
भारत के खिलाफ सुनियोजित प्रोपेगेंडा
बेन सॉल पर आरोप है कि उन्होंने सिडनी यूनिवर्सिटी में रहते हुए एक एजेंडे के तहत भारत के विरुद्ध दुष्प्रचार किया। पिछले साल नवंबर 2025 में उन्होंने एक साझा बयान जारी किया था, जिसमें भारत द्वारा पाकिस्तान में मौजूद आतंकी नेटवर्क को खत्म करने के लिए किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' की आलोचना की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान अचानक नहीं आया था, बल्कि यह चीन के इशारों पर रची गई एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था।
मानवाधिकार के नाम पर दोहरा मापदंड
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ के तौर पर बेन सॉल का कार्य मानवाधिकारों की रक्षा करना था, लेकिन चीन से मिली इस बड़ी फंडिंग ने उनके काम करने के तरीके को संदिग्ध बना दिया है। जानकार मानते हैं कि चीन जैसे देश, जो खुद मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आलोचना झेलते हैं, वे अपने फायदे के लिए भारत जैसे देशों को बदनाम करने हेतु ऐसे विशेषज्ञों का उपयोग कर रहे हैं। फिलहाल, इस मामले के सामने आने के बाद भारत के खिलाफ रची गई इस अंतरराष्ट्रीय साजिश की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं।
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