चीन के सीक्रेट स्पेसक्राफ्ट 'डिवाइन ड्रैगन' ने अंतरिक्ष में छोड़ी रहस्यमयी वस्तु, दुनिया भर के वैज्ञानिक हैरान

चीन के रहस्यमयी स्पेस प्लेन शेनलॉन्ग ने अंतरिक्ष में एक अज्ञात पेलोड तैनात किया है, जिसे न्यूजीलैंड के राडार ने ट्रैक किया है। फरवरी 2026 में शुरू हुए इस चौथे मिशन के बाद से चीन ने अब तक कुल नौ अज्ञात पेलोड अंतरिक्ष में छोड़े हैं, जिसने वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

अंतरिक्ष में चीन की रहस्यमयी गतिविधियां

चीन का एक टॉप-सीक्रेट स्पेसक्राफ्ट इन दिनों अंतरिक्ष में ऐसी हरकतें कर रहा है जिसने दुनियाभर के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इस बेहद खुफिया स्पेस प्लेन ने हाल ही में पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट में एक अज्ञात ऑब्जेक्ट या पेलोड को रिलीज किया है। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बहस तेज हो गई है कि आखिर चीन अंतरिक्ष में क्या छुपा रहा है।

क्या है शेनलॉन्ग या डिवाइन ड्रैगन

इस रहस्यमयी विमान को शेनलॉन्ग के नाम से जाना जाता है, जिसे दुनिया में 'डिवाइन ड्रैगन' के नाम से भी पहचान मिली है। यह एक अत्याधुनिक रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट है। इसकी कार्यप्रणाली बेहद अनूठी है। इसे वर्टिकल रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में लॉन्च किया जाता है, लेकिन मिशन पूरा होने के बाद यह विमान किसी सामान्य हवाई जहाज की तरह रनवे पर लैंड करने में सक्षम है। चीन ने इस पूरे मिशन से जुड़ी जानकारियों को अत्यंत गुप्त रखा है। अब तक किसी भी अन्य देश के पास इस विमान की कोई स्पष्ट या विस्तृत तस्वीर उपलब्ध नहीं है। चीनी अंतरिक्ष अधिकारियों ने इसके डिजाइन और इसके पीछे के वास्तविक उद्देश्य को लेकर अब तक चुप्पी साध रखी है।

मिशन का इतिहास और रहस्यमयी पेलोड

शेनलॉन्ग ने सितंबर 2020 में अपनी पहली उड़ान भरी थी, जो दो दिनों तक चली थी। इसके बाद दूसरा मिशन अगस्त 2022 से शुरू होकर मई 2023 तक चला। वहीं, तीसरे मिशन में यह विमान दिसंबर 2023 से सितंबर 2024 तक लगभग नौ महीने अंतरिक्ष में रहा। साल 2022 से लेकर अब तक यह विमान कुल नौ रहस्यमयी पेलोड अंतरिक्ष में तैनात कर चुका है। 700 दिनों से अधिक समय तक लो अर्थ ऑर्बिट में रहने के बाद भी यह विमान रहस्य बना हुआ है। साल 2024 में ली गई एक धुंधली तस्वीर में इससे कुछ चमकदार हिस्से निकलते हुए देखे गए थे, जिन्हें विशेषज्ञ सोलर पैनल मान रहे हैं।

न्यूजीलैंड के राडार ने कैसे पकड़ी हरकत

चीन का यह चौथा मिशन 7 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। इसे गोबी रेगिस्तान स्थित जियूक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्ग मार्च 2एफ रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया था। उसके बाद से इस मिशन की गतिविधियों को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई थी। हालांकि, 22 जून 2026 को प्राइवेट स्पेस सर्विलांस कंपनी लियोलैब्स ने इस विमान के निकट एक अज्ञात ऑब्जेक्ट को ट्रैक किया। न्यूजीलैंड में स्थापित कंपनी के विशेष राडार ने इस पेलोड को पकड़ा। डेटा के विश्लेषण से पता चला कि यह ऑब्जेक्ट कंपनी के ज्ञात सैटेलाइट कैटलॉग का हिस्सा नहीं था। लियोलैब्स ने स्पष्ट रूप से दावा किया कि इसे सीधे तौर पर चीनी स्पेस प्लेन से ही रिलीज किया गया है।

वैज्ञानिकों और एजेंसियों की प्रतिक्रिया

ब्रिटेन की डरहम यूनिवर्सिटी के खगोलशास्त्री जोनाथन मैक्डोवेल ने भी इस जानकारी की पुष्टि की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी कि अमेरिकी स्पेस फोर्स भी इस नए ऑब्जेक्ट को लगातार ट्रैक कर रही है। मैक्डोवेल के मुताबिक, यह एक छोटा क्यूबसैट हो सकता है, जिसे अक्सर बड़े सैटेलाइटों के साथ भेजा जाता है। लियोलैब्स के आधिकारिक डेटा के अनुसार, 22 जून 2026 को 02:30 UTC पर इस अज्ञात ऑब्जेक्ट की उपस्थिति दर्ज की गई थी। अमेरिकी स्पेस फोर्स ने भी इसे एक नया कैटलॉग नंबर 69673 दिया है, जिसे चीनी स्पेस प्लेन CSSHQ4 (2026-024A) से अलग किया गया है।

क्या चीन अंतरिक्ष में हथियारों का परीक्षण कर रहा है

इस सीक्रेट स्पेस प्लेन के वास्तविक लक्ष्यों को लेकर रक्षा विशेषज्ञों के बीच काफी अटकलें हैं। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि शेनलॉन्ग का मुख्य उद्देश्य अन्य स्पेसक्राफ्ट के बेहद करीब जाकर ऑपरेशन करने की क्षमता हासिल करना है। इसके जरिए चीन अंतरिक्ष में युद्धाभ्यास का अभ्यास कर रहा है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये अज्ञात ऑब्जेक्ट्स खुफिया निगरानी सैटेलाइट हो सकते हैं। सबसे गंभीर आशंका इस बात को लेकर है कि क्या चीन अंतरिक्ष में एंटी-सैटेलाइट हथियारों का गुप्त परीक्षण कर रहा है। हालांकि, अभी तक किसी भी देश के सैटेलाइट को नुकसान पहुंचने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पारदर्शिता का अभाव

गौरतलब है कि अमेरिका के पास भी बोइंग एक्स-37बी जैसा सीक्रेट स्पेस प्लेन है, लेकिन अमेरिकी अधिकारी अपने विमान के मिशन और लक्ष्यों के बारे में दुनिया को जानकारी देते रहे हैं। इसके विपरीत, चीन अपने पूरे अंतरिक्ष कार्यक्रम को पूर्ण गोपनीयता के साथ संचालित कर रहा है, जिससे दुनिया भर में अनिश्चितता और तनाव की स्थिति पैदा हो रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चीन इस मिशन के अगले चरण में क्या कदम उठाता है।

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