भारतीय वायुसेना को मिलेगी नई ताकत, 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद प्रक्रिया हुई तेज

भारत सरकार 114 फाइटर जेट खरीदने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना को जल्द ही अंतिम रूप देने की तैयारी में है, जिसमें स्वदेशी हथियारों और तकनीक के एकीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है।

राफेल डील पर तेज हुई प्रक्रिया

फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। भारतीय वायुसेना के लिए 114 फाइटर जेट खरीदने का जो प्रस्ताव है, वह अब अपनी रफ्तार पकड़ चुका है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना को इस चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की कोशिश यह है कि इस सौदे में भारत के स्वदेशी रक्षा तंत्र का ज्यादा से ज्यादा समावेश हो और भारतीय निर्मित हथियारों को विमानों का मुख्य हिस्सा बनाया जाए।

भारतीय हथियारों का एकीकरण

जब रक्षा सचिव से यह सवाल किया गया कि क्या इन विमानों में भारतीय हथियारों को लगाया जाएगा, तो उन्होंने सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने बताया कि पूर्व में खरीदे गए राफेल मरीन में भी भारतीय हथियारों को जोड़ने पर सहमति बनी थी, और अब इस 114 विमानों वाले प्रोजेक्ट को और आगे ले जाया जा रहा है। यह प्रोग्राम 'खरीदें और बनाएं' (buy-and-make) की तर्ज पर आधारित है। इसका सीधा अर्थ यह है कि अधिकांश विमानों की असेंबलिंग भारत की धरती पर ही की जाएगी। साथ ही, इन विमानों में भारतीय रक्षा प्रणालियों और हथियारों का बड़े पैमाने पर एकीकरण किया जाएगा, जिससे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल होगी।

बोली प्रक्रिया का चल रहा मूल्यांकन

रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) के तहत जितनी भी बोलियां (bids) प्राप्त हुई थीं, उनका औपचारिक रूप से मूल्यांकन किया जा रहा है। रक्षा सचिव ने कहा कि संबंधित कंपनियों द्वारा अपनी बोलियां सौंप दी गई हैं और उन पर सूक्ष्मता से काम हो रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष के समाप्त होने से पहले ही भारत इस खरीद प्रक्रिया में किसी निर्णायक मोड़ पर पहुंच जाएगा।

LCA Mk2 और घरेलू एविएशन प्रोग्राम

भारतीय रक्षा मंत्रालय अपने घरेलू एविएशन मिशनों के लिए काफी सतर्क है और एक निश्चित समय सीमा के भीतर काम पूरा करने पर जोर दे रहा है। LCA Mk2 प्रोजेक्ट अब पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत अपने अगले चरण में है, जिसमें अगले साल शुरुआती उड़ान परीक्षणों (initial flight trials) की तैयारी चल रही है। रक्षा सचिव के मुताबिक, LCA Mk2 की पहली उड़ान अगले साल के मध्य में प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि प्रोटोटाइप आने के बाद वायुसेना इसका मूल्यांकन करेगी। हालांकि, शुरुआती आवश्यकता 120 विमानों की बताई गई थी, लेकिन वास्तविक फैसला प्रोटोटाइप के प्रदर्शन के बाद ही लिया जाएगा।

इस पूरी प्रक्रिया में HAL की भूमिका के साथ-साथ निजी क्षेत्र और MSME सेक्टर की भागीदारी भी अहम है। HAL अब न केवल विमान के मुख्य हिस्सों का निर्माण कर रहा है, बल्कि फ़्यूजलेज जैसे बड़े कंपोनेंट्स तैयार करने के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियों का सहयोग भी ले रहा है।

AMCA और पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट

पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के मुद्दे पर रक्षा सचिव ने स्पष्ट किया कि भारत अभी किसी भी वैश्विक पांचवीं पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ़्ट प्रोग्राम में शामिल होने का इरादा नहीं रखता है। भारत का पूरा ध्यान अपने स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट पर है। AMCA कार्यक्रम अब उस स्तर पर पहुंच चुका है जहां शॉर्टलिस्ट किए गए वेंडर्स से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) मांगे जा चुके हैं। चूंकि यह काम बेहद जटिल है, इसलिए वेंडर्स ने और अधिक समय की मांग की है और सरकार उन्हें थोड़ा अतिरिक्त समय दे रही है। फिलहाल, भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह से अपने AMCA कार्यक्रम पर ही निर्भर है और उसे विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

https://www.indiatv.in/india/national/deal-to-acquire-114-rafale-fighter-jets-likely-to-be-completed-soon-indian-weapons-will-be-included-2026-10-02-1246495