मिथिलांचल में लहरचट्टा का प्रकोप
आम के मौसम के दौरान बगीचों और पेड़ों के आसपास लाल चींटियां बड़ी संख्या में सक्रिय हो जाती हैं। मिथिलांचल के स्थानीय लोग इन्हें लहरचट्टा के नाम से बुलाते हैं। जब ये चींटियां काटती हैं, तो त्वचा पर तीव्र दर्द के साथ-साथ तेज जलन और सूजन का अनुभव होना बहुत सामान्य बात है।
पारंपरिक घरेलू उपचार
ग्रामीण अंचलों में आज भी लोग इन चींटियों के काटने पर डॉक्टर के पास जाने से पहले अपने घर के बड़े-बुजुर्गों द्वारा सुझाए गए पारंपरिक तरीकों को अपनाते हैं। माना जाता है कि ये तरीके राहत प्रदान करने में काफी कारगर सिद्ध होते हैं।
- लोहे का उपयोग: काटने वाले स्थान पर लोहे की किसी धातु की वस्तु को धीरे-धीरे रगड़ा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह प्रक्रिया दर्द को कम करने में सहायक है।
- गोबर और चूने का लेप: कई लोग प्रभावित जगह पर गोबर या सफेद चूना लगाने की सलाह देते हैं। ऐसा माना जाता है कि यह लगाने से सूजन और जलन की समस्या में काफी हद तक आराम मिलता है।
यद्यपि ये उपाय पीढ़ी दर पीढ़ी चले आ रहे हैं, लेकिन अगर किसी को एलर्जी या अधिक समस्या हो, तो उचित सावधानी बरतना आवश्यक है।
https://hindi.news18.com/videos/lifestyle/tips-and-tricks-what-should-you-do-if-bitten-by-a-red-ant-try-this-effective-mithilanchal-traditional-home-remedy-local18-10605991.html