सुल्तानपुर का ऐतिहासिक गौरव
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में कई ऐसे स्थान हैं जो अपने भीतर सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए हैं। जिले के महमूदपुर, गढ़ा और धोपाप जैसे क्षेत्रों में मिली बौद्ध कालीन प्राचीन मूर्तियां सुल्तानपुर के गौरवशाली अतीत की गवाही देती हैं। इसी क्रम में जिले के मुख्यालय से महज 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हरीपुर बनवा गांव भी अपनी एक विशेष पहचान रखता है। यहां स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर न केवल अपनी वास्तुकला बल्कि अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए भी दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।
11वीं शताब्दी की अनोखी नक्काशी
इस प्राचीन शिव मंदिर में स्थापित मूर्ति की बनावट अपने आप में अनूठी है। स्थानीय लोगों और जानकारों के अनुसार, यह मूर्ति लगभग 10वीं और 11वीं शताब्दी के काल की मानी जाती है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका पत्थर है, जो चौकोर आकृति में तराशा गया है। इस पत्थर पर बेहद बारीकी से छोटी-छोटी कई मूर्तियों को उकेरा गया है। इन आकृतियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे वे अलग-अलग मुद्राओं में नृत्य कर रही हों। कला की यह बारीकी और प्राचीनता इस मंदिर को जिले के अन्य धार्मिक स्थलों से अलग खड़ा करती है।
पीढ़ियों से जुड़ी है ग्रामीणों की आस्था
हरीनाथपुर गांव के निवासी विनोद कुमार बताते हैं कि यह मंदिर और इसमें स्थापित शिवलिंगम और मूर्तियां कई सौ साल पुरानी हैं। गांव के बुजुर्गों के अनुसार, पहले यह मूर्ति किसी अन्य स्थान पर विराजमान थी, जिसे बाद में पूर्वजों द्वारा वर्तमान स्थल पर पूरे विधि-विधान से स्थापित किया गया था। तब से लेकर आज तक यह स्थान आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ग्रामीणों का अटूट विश्वास है कि जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे मन से अपनी प्रार्थना लेकर आता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस गहरी आस्था के चलते आसपास के गांव जैसे हरीपुर बनवा, जुड़ारा और हरीनाथपुर के लोग भी बड़ी संख्या में यहां दर्शन करने आते हैं।
भंडारे और उत्सव का आयोजन
इस मंदिर के प्रति लोगों का जुड़ाव समय के साथ और मजबूत हुआ है। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन तो करते ही हैं, साथ ही वे मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन भी कराते हैं। इस प्रकार यह स्थल न केवल एक धार्मिक केंद्र है बल्कि सामाजिक मिलन का भी एक माध्यम बन गया है। ग्रामीणों के आपसी सहयोग से अब इस पवित्र स्थल को विकसित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी इस सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संभाल सकें।
मंदिर तक कैसे पहुंचें
यदि आप भी इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक वातावरण से भरपूर मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो आपको सुल्तानपुर शहर से लगभग 7 किलोमीटर की यात्रा तय करनी होगी। यह प्राचीन मूर्ति सुल्तानपुर के हरीपुर बनवा गांव के अंतर्गत आने वाले हरीनाथपुर गांव में स्थित है। ग्रामीण इस धरोहर को संजोने के लिए लगातार प्रयासरत हैं और आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करते हैं। यह स्थान उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो इतिहास, पुरातत्व और आध्यात्मिकता में रुचि रखते हैं।
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