राम मंदिर चढ़ावा घोटाला और एसआईटी का पर्दाफाश
अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे और दान में मिली कीमती सामग्री की चोरी का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। इस गंभीर प्रकरण में विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसके आधार पर पुलिस ने कुल आठ आरोपियों को हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। इस बड़े खुलासे के बाद राम मंदिर तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट में भी खलबली मची है। घटना की गंभीरता को देखते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
एसआईटी की विस्तृत जांच में सामने आया है कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों यानी 2022-23, 2023-24 और 2024-25 की आंतरिक ऑडिट रिपोर्टों में बड़ी खामियां मौजूद थीं। इन दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि मंदिरों में चढ़ाई गई हुंडियों की वास्तविक संख्या और रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर है। यह सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और सुनियोजित चोरी की ओर इशारा करता है।
कैसे शक के घेरे में आई मंदिर की व्यवस्था
चोरी का यह खेल तब पकड़ में आया जब मई के आखिरी सप्ताह में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने बैंक में जमा होने वाली धनराशि का मिलान दान पेटियों से प्राप्त राशि से करने का फैसला किया। रोजाना दान पेटियां खाली करने की प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा की गई। एक दान पेटी में औसतन 6 से 7 लाख रुपये निकलते थे, लेकिन कुछ हफ्तों के दौरान 500 रुपये के नोटों की गड्डियों में भारी कमी देखी गई।
संदेह गहराने पर नोट गिनने वाले कक्ष में चुपके से हिडन कैमरे लगवाए गए। एक सप्ताह की फुटेज खंगालने पर जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को हैरान कर दिया। नोट गिनने वाले कर्मचारी सीसीटीवी कैमरे के सामने जानबूझकर खड़े हो जाते थे ताकि कोई दूसरा व्यक्ति या कैमरा उनकी संदिग्ध गतिविधि को न देख सके। इसी आड़ में उनका साथी नोटों की गड्डियों में से पैसे निकालकर अपने कपड़ों में छिपा लेता था।
चोरी की शातिर तकनीक और हेराफेरी का तरीका
जांच में पता चला है कि आरोपी चोरी करने के लिए बेहद शातिर तरीके अपना रहे थे। कर्मचारी प्रत्येक गड्डी में कुछ अतिरिक्त नोट जबरदस्ती फंसा देते थे। जब बैंक में जमा करने के लिए रकम भेजी जाती थी, तो हर गड्डी को अलग-अलग गिनने के बजाय सिर्फ गड्डी की संख्या को आधार मानकर वाउचर तैयार किया जाता था। बाद में, जब यह रकम मंदिर से बैंक ले जाई जाती थी, तो रास्ते में या मौका मिलते ही वे अतिरिक्त नोट निकाल लेते थे। इससे वाउचर और बैंक में जमा रकम का मिलान तो हो जाता था, लेकिन बीच का अंतर आरोपियों की जेब में चला जाता था।
इस पूरी साजिश में अनुकल्प मिश्रा का नाम मुख्य रूप से सामने आया है, जो वाउचर बनाने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता था। वह अपने बहनोई लव कुश मिश्रा के माध्यम से इस हेराफेरी को अंजाम दे रहा था। छापेमारी के दौरान लव कुश मिश्रा के घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
कर्मचारियों का नेटवर्क और सुरक्षा में लापरवाही
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि सभी आरोपी एक दूसरे से परिचित थे और सिफारिशों के जरिए मंदिर में काम पर रखे गए थे। रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, जो चंपत राय के ड्राइवर थे, ने अपने चचेरे भाई मनीष यादव को नोट गिनने की प्रक्रिया में लगवाया था। इसी तरह अन्य कर्मचारियों ने भी अपने रिश्तेदारों को इस काम में फिट कराया था।
मंदिर परिसर में सुरक्षा की बड़ी चूक भी सामने आई है। ड्यूटी खत्म होने के बाद किसी भी कर्मचारी की तलाशी नहीं ली जाती थी। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर कर्मचारी बेखौफ होकर मंदिर के उस हिस्से से चोरी करने लगे थे, जहां दान पेटियां खोली जाती थीं और नोटों की छंटाई की जाती थी। जांच में अविनाश पांडे की सीसीटीवी फुटेज भी मिली है, जिसमें वह चोरी करता दिख रहा है। बाद में पुष्टि हुई कि उसने चोरी की रकम को अपने बैंक खाते में भी जमा किया था।
सोने-चांदी के गहनों पर भी हाथ
केवल नकदी ही नहीं, बल्कि भक्तों द्वारा दान किए गए बेशकीमती जेवर भी इन लोगों के निशाने पर थे। श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई बालियां, झुमकी, नथ और भगवान रामलला के लिए भेंट किए गए कंगन व पैजनिया जैसे आभूषण भी गायब कर दिए जाते थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नोटों की गिनती या जेवरात की लिखा-पढ़ी होने से पहले ही ये लोग सामान को पार कर देते थे।
आरोपियों की भूमिका और एसआईटी रिपोर्ट
एसआईटी की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों की भूमिकाएं इस प्रकार थीं:
- करुणेश पांडेय: चढ़ावे को गणना कक्ष तक ले जाने और उसे गिनने का काम।
- रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव: मंदिर में बेरोकटोक कहीं भी आने-जाने की छूट थी। वह दानपात्रों की देखरेख और उन्हें बेसमेंट तक पहुंचाने का जिम्मा संभालता था।
- सुभाष चंद्र श्रीवास्तव: भारतीय स्टेट बैंक का रिटायर्ड कर्मचारी है, जिसे नोट गिनने की पूरी प्रक्रिया का इंचार्ज बनाया गया था। उसके पास स्टाफ की निगरानी का प्रभार था।
- लवकुश मिश्रा: नकदी और चढ़ावे को गिनने वाली टीम का सदस्य।
- अनुकल्प मिश्रा: नोट गिनने की प्रक्रिया में शामिल और वाउचर बनाने का काम देखता था।
- मनीष यादव: दानपात्रों से नोट निकालने और उन्हें अलग करने का काम।
- अविनाश शुक्ला: दान पात्रों से नकदी निकालने और उसे गणना कक्ष तक पहुंचाने की जिम्मेदारी।
आगे क्या होगी कार्रवाई
पुलिस सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में यह जांच केवल वादी की शिकायत पर आगे बढ़ रही है। एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कई अन्य नाम भी जुड़ सकते हैं। अभी आरोपियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और उनका मिलान किया जा रहा है। इसके साथ ही, सभी आरोपियों के बैंक खातों की गहन जांच शुरू कर दी गई है ताकि पैसों के लेनदेन का पता चल सके। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
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