फॉक्सवैगन में बड़े बदलाव की तैयारी
जर्मनी की वाहन निर्माता कंपनी फॉक्सवैगन, जो कि विश्व की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों में गिनी जाती है, आने वाले समय में एक बड़े संकट और बदलाव के दौर से गुजर रही है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अपने संचालन को बचाने और मुनाफा बढ़ाने के लिए लगभग 1 लाख कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की योजना बना रही है। यह निर्णय कंपनी के इतिहास की सबसे बड़ी लागत कटौती और पुनर्गठन प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसके तहत कई फैक्ट्रियों को बंद करने की तैयारी भी की जा रही है।
क्यों लिए जा रहे हैं इतने सख्त फैसले?
फॉक्सवैगन के CEO ओलिवर ब्लूम कंपनी को एक नई दिशा में ले जाने और बढ़ते वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच उसे मुनाफे में लाने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले कुछ समय से कंपनी को कई गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इसमें अमेरिका द्वारा आयातित वाहनों पर लगाए गए टैरिफ, चीन के बाजार में मांग में आई कमी और यूरोप में BYD और Stellantis जैसी कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर मुख्य कारण हैं। इन्हीं दबावों के चलते कंपनी अपने बिजनेस मॉडल को पूरी तरह से बदलने और खर्चों में भारी कटौती करने पर मजबूर है।
1 लाख कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा
मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि फॉक्सवैगन अब अपनी पुरानी छंटनी की योजनाओं के दायरे को और बढ़ा रही है। फिलहाल कंपनी में कुल 6.57 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। पहले कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 50,000 कर्मचारियों की संख्या कम करना था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 1 लाख के करीब ले जाया जा रहा है। अब तक लगभग 28,000 कर्मचारी कंपनी से स्वेच्छा से अलग होने की प्रक्रिया पर सहमति दे चुके हैं।
फैक्ट्रियों पर ताला लगाने की योजना
केवल छंटनी ही नहीं, बल्कि कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता को सीमित करने के लिए जर्मनी में स्थित चार बड़ी फैक्ट्रियों को बंद करने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। जिन इकाइयों पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है, उनमें ऑडी की नेकार्सुल्म फैक्ट्री, साथ ही फॉक्सवैगन के हैनोवर, ज़्विकाऊ और एम्डेन प्लांट शामिल हैं। इसके अलावा, कंपनी कुछ कंपोनेंट निर्माण संयंत्रों को अलग करने और ब्रांड ढांचे में बड़े बदलाव की रणनीति पर काम कर रही है ताकि कामकाज को आसान और अधिक लाभदायक बनाया जा सके।
11 अरब यूरो का खर्च घटाने का लक्ष्य
फॉक्सवैगन ने इस दशक के अंत तक अपने प्रशासनिक और परिचालन खर्चों में 11 अरब यूरो (जो कि लगभग 12.5 अरब डॉलर के बराबर है) की कटौती करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए कंपनी ने अपनी वार्षिक उत्पादन क्षमता को 1.2 करोड़ वाहनों से कम करके 90 लाख वाहन करने का फैसला पहले ही ले लिया है।
कर्मचारी संगठनों का कड़ा विरोध
कंपनी की इन योजनाओं के खिलाफ कर्मचारियों और यूनियनों ने मोर्चा खोल दिया है। वर्क्स काउंसिल और जर्मनी के प्रमुख ट्रेड यूनियन आईजी मेटल ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी बड़े स्तर पर छंटनी करती है या फैक्ट्रियां बंद करती है, तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
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