झारखंड को मिली नई पहचान
झारखंड के कोडरमा जिले का झुमरी तिलैया शहर लंबे समय से अभ्रक नगरी के नाम से मशहूर रहा है, लेकिन अब इसे एक और खास पहचान मिल गई है। यहां का प्रसिद्ध केसरिया कलाकंद अब आधिकारिक तौर पर जीआई टैग प्राप्त कर चुका है। यह उपलब्धि राज्य के लिए बेहद खास है क्योंकि केसरिया कलाकंद झारखंड का पहला ऐसा खाद्य उत्पाद बन गया है, जिसे यह विशिष्ट भौगोलिक पहचान हासिल हुई है। इस सम्मान के मिलने के बाद स्थानीय दुकानदारों और निवासियों में खुशी की लहर है। अब सभी को उम्मीद है कि इस टैग के मिलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस मिठाई की मांग और अधिक बढ़ेगी।
सात दशक पुराना इतिहास
इस मिठाई का इतिहास विभाजन के बाद के दौर से जुड़ा है। बंटवारे के बाद पाकिस्तान से आकर झुमरी तिलैया में बसे भाटिया परिवार ने वर्ष 1955 में झंडा चौक के नजदीक भाटिया मिष्ठान नाम से अपनी दुकान की शुरुआत की थी। इसी प्रतिष्ठान ने पहली बार कलाकंद की शुरुआत की। अपनी अनूठी और मुलायम दानेदार बनावट के कारण यह मिठाई बहुत कम समय में लोगों के दिलों में बस गई। धीरे-धीरे इसकी ख्याति पूरे क्षेत्र में फैल गई और यह झुमरी तिलैया की एक अनिवार्य पहचान बन गई।
आनंद विहार और परंपरा का विस्तार
मिठाई के जानकारों का मानना है कि वर्ष 1965 में आदर्श जलपान की स्थापना के बाद इस कलाकंद को एक नई पहचान मिली। बाद में इसी दुकान का नाम बदलकर आनंद विहार कर दिया गया। उस दौर में आदर्श जलपान और छाबड़ा स्वीट्स का कलाकंद लोगों की पहली पसंद हुआ करता था। समय के साथ कन्हैया मिष्ठान जैसी कई अन्य दुकानों ने भी इस कलाकंद की परंपरा को आगे बढ़ाया और आज भी इसे पूरे मनोयोग से तैयार किया जा रहा है।
तैयार करने की खास विधि
कोडरमा का यह मशहूर कलाकंद पूरी तरह से स्थानीय शुद्ध दूध से बनाया जाता है। इसे बनाने की प्रक्रिया काफी धैर्य वाली है। सबसे पहले दूध को तेज आंच पर काफी देर तक उबाला जाता है ताकि वह गाढ़ा हो सके। इसके बाद विनेगर मिले पानी के छिड़काव से इसे दानेदार रूप दिया जाता है। तैयार मिश्रण को ट्रे में फैलाकर ठंडा होने के लिए रखा जाता है और अंत में इसके ऊपर केसर और बेहतरीन ड्राई फ्रूट्स डालकर इसे आकर्षक बनाया जाता है। हालांकि शुरुआत में यहां सिर्फ सफेद कलाकंद ही बनता था, लेकिन समय के साथ केसरिया कलाकंद ने अपनी एक अलग धाक जमा ली।
दिग्गज हस्तियों और वीआईपी लोगों की पसंद
इस कलाकंद का स्वाद केवल आम लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के बड़े राजनेता भी इसके प्रशंसक हैं। संजीव खेतान के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी कोडरमा के इस केसरिया कलाकंद का स्वाद ले चुके हैं और उन्होंने इसकी काफी सराहना भी की है। इसके अलावा, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के घर के आयोजनों में भी यह मिठाई भेजी जाती रही है। तेजस्वी यादव की शादी के दौरान विशेष ऑर्डर पर आनंद विहार से 300 किलो केसरिया कलाकंद भेजा गया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही डिमांड
इस मिठाई की पहुंच अब सात समंदर पार तक हो गई है। अमेरिका, थाईलैंड और ब्रिटेन जैसे देशों में भी इसकी भारी मांग है। पहले इसे मिट्टी के बर्तनों में पैक करके भेजा जाता था, लेकिन अब तकनीक के साथ पैकिंग भी बदली है। अब इसे प्लास्टिक कंटेनरों में सुरक्षित रूप से पैक करके भेजा जाता है। सामान्य तापमान पर यह मिठाई लगभग 72 घंटे तक बिल्कुल ताजा बनी रहती है।
जीआई टैग की सफलता और भविष्य की राह
इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के पीछे कोडरमा के पूर्व उप विकास आयुक्त और बाद में उपायुक्त रहे आईएएस ऋतुराज के प्रयास अहम रहे हैं। उन्होंने ही इसे जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया। बाजार में फिलहाल इसकी कीमत लगभग 480 रुपये प्रति किलो के आसपास है। संजीव खेतान ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में भी अपने कारीगरों के जरिए इसे बनाने की कोशिश की थी, लेकिन वहां का स्वाद वैसा नहीं बन पाया जैसा झुमरी तिलैया का है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे यहां के पानी की विशेष गुणवत्ता का बड़ा हाथ है, जो इसे अन्य स्थानों से अलग बनाती है। अब जीआई टैग मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि कोडरमा का केसरिया कलाकंद दुनिया के मंच पर नई ऊंचाइयों को छुएगा।
https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/recipe-jhumri-tilaiya-kesariya-kalakand-tasted-by-amit-shah-and-rajnath-singh-supplied-to-the-us-and-uk-local18-10605339.html