खेती के साथ शुरू करें अपना बिजनेस, केवल 5 डिसमिल जमीन में होगी लाखों की कमाई

झारखंड की राजधानी रांची में प्रदान संस्था ने किसानों के लिए एक अभिनव बिजनेस मॉडल पेश किया है, जिसमें मात्र 5 डिसमिल जमीन पर पॉलीहाउस, नर्सरी और वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाकर मोटी कमाई की जा सकती है।

रांची के किसानों के लिए खास बिजनेस मॉडल

झारखंड की राजधानी रांची में किसानों की तकदीर बदलने के लिए एक विशेष पहल की गई है। सरकार के साथ मिलकर काम करने वाली एनजीओ 'प्रदान' ने एक अनूठा मॉडल विकसित किया है, जिसके माध्यम से किसान अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे एक सफल व्यवसायी के रूप में भी खुद को स्थापित कर सकेंगे। इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को कई गुना बढ़ाना है। संस्था ने मात्र 5 डिसमिल जमीन के दायरे में एक एकीकृत ढांचा तैयार किया है, जिसमें केंचुआ खाद उत्पादन से लेकर पॉलीहाउस और नर्सरी तक की सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।

5 डिसमिल जमीन का पूरा गणित

संस्था के प्रतिनिधि कुलदीप ने इस मॉडल की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 5 डिसमिल जमीन के छोटे से क्षेत्रफल में एक साथ कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। इस एकीकृत मॉडल में निम्नलिखित सुविधाएं शामिल हैं:

  • पॉलीहाउस और नर्सरी: इस हिस्से में उच्च मूल्य वाली फसलों के पौधों और उन्नत किस्म की पौध तैयार की जाएगी।
  • केंचुआ खाद और वर्मी कंपोस्ट: जैविक खेती के लिए उच्च गुणवत्ता वाली खाद का निर्माण यहीं होगा।
  • गोबर खाद और जैविक दवाइयां: फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए पूरी तरह से प्राकृतिक और जैविक मेडिसिन का निर्माण किया जाएगा।
  • किसान सेवा केंद्र और ऑफिस: इसी परिसर में एक छोटा कार्यालय भी बनाया जाएगा, जहाँ से व्यापार की दैनिक गतिविधियों का संचालन और प्रबंधन किया जाएगा।

कुलदीप के अनुसार, इस मॉडल के जरिए जो भी सामग्री उत्पादित होगी, उसे स्थानीय किसानों के अलावा बड़ी कृषि कंपनियों को भी आपूर्ति की जा सकती है। कई प्रगतिशील किसान पहले से ही इस मॉडल को अपनी जमीन पर लागू कर चुके हैं और सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।

निवेश और आत्मनिर्भरता

इस बिजनेस मॉडल को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए किसान को शुरुआती पूंजी के रूप में 5 से 10 लाख रुपये के निवेश की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही किसान के पास अपनी जमीन होना अनिवार्य है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी आत्मनिर्भरता है। परिसर में स्थित कार्यालय की छत पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इसके द्वारा उत्पन्न सौर ऊर्जा से पूरे केंद्र की बिजली की आवश्यकता पूरी होगी, जिससे ग्रिड की बिजली पर होने वाला खर्च शून्य हो जाएगा।

प्रशिक्षण और बाजार की सुविधा

इस मॉडल को अपनाने वाले किसानों को सरकार और एनजीओ 'प्रदान' की ओर से हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा, जिसमें निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • वैज्ञानिक प्रशिक्षण: केंचुआ खाद, जैविक उर्वरक और बायो-मेडिसिन बनाने की पूरी वैज्ञानिक पद्धति का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • मार्केटिंग सपोर्ट: उत्पादित उत्पादों को बेचने के लिए सरकार और संस्था की ओर से बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
  • प्रदर्शन और सेमिनार: किसानों को सरकारी मेलों में मुफ्त स्टॉल लगाने का मौका मिलेगा। साथ ही, उन्हें दूसरे राज्यों में जाकर नई तकनीकों को सीखने का अवसर भी दिया जाएगा ताकि वे खुद को बेहतर बना सकें।

ब्रांडेड पैकेजिंग से होगा मुनाफा

कुलदीप का मानना है कि कई किसानों के पास जमीन और बजट दोनों होते हैं, लेकिन सही दिशा और सटीक व्यावसायिक जानकारी के अभाव में वे पारंपरिक खेती के चक्र से बाहर नहीं निकल पाते हैं। यह मॉडल ऐसे किसानों के लिए एक शानदार अवसर है। यहाँ किसान पशुओं के लिए पौष्टिक चारा, जैविक कीटनाशक और उच्च गुणवत्ता वाली खाद बना सकते हैं। इन उत्पादों की बेहतरीन पैकेजिंग करके उन्हें एक ब्रांडेड लुक देकर बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा सकता है।

संपर्क कैसे करें

यदि आप एक किसान हैं और आपके पास पर्याप्त जमीन व बजट है, और आप इस आधुनिक कृषि-बिजनेस मॉडल को अपनाना चाहते हैं, तो अधिक जानकारी और उचित मार्गदर्शन के लिए आप एनजीओ 'प्रदान' के आधिकारिक मोबाइल नंबर 9431903149 पर संपर्क कर सकते हैं। यह मॉडल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में सक्षम है।

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