भारतीय सिनेमा में आमतौर पर फिल्मों को दो खानों में बांटकर देखा जाता है। एक ओर पूरी तरह से मनोरंजन परोसने वाली कमर्शियल फिल्में होती हैं, तो दूसरी ओर गंभीर और सशक्त कहानी पर टिकी कंटेंट-आधारित ड्रामा फिल्में। 'पेद्दी' इन दोनों ही श्रेणियों के बीच की दीवार को तोड़ती हुई एक ऐसी अनूठी कृति बनकर सामने आती है, जो दोनों जॉनर का बेहद खूबसूरत और संतुलित मेल पेश करती है।
दो अलग धाराओं का सुंदर संगम
नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित निर्देशक बुची बाबू सना ने इस फिल्म में अपनी खास इमोशनल गहराई के साथ कोई समझौता नहीं किया है। उन्होंने एक प्रभावशाली कहानी को भव्य पैमाने पर इस तरह गढ़ा है कि वह सीधे दर्शकों के दिल तक पहुंचती है। फिल्म न तो भावनाओं की कीमत पर भव्यता दिखाती है और न ही बड़े स्तर के लिए संवेदनशीलता को पीछे छोड़ती है।
राम चरण की दमदार मौजूदगी
राम चरण की जबरदस्त अदाकारी इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है। उनका अभिनय फिल्म को महज एक सिनेमाई प्रस्तुति से कहीं आगे ले जाता है और इसे एक ऐसा अनुभव बना देता है, जो थिएटर में बैठे दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है। यही वजह है कि यह फिल्म एक सामान्य रिलीज से बढ़कर एक यादगार अनुभव के रूप में सामने आती है।
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