सियासी पारा चढ़ा
राजस्थान की राजनीति में इस समय गोविंद सिंह डोटासरा और किरोड़ीलाल मीणा के बीच छिड़ी राजनीतिक जंग चर्चा का केंद्र बनी हुई है। दोनों नेताओं के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे राज्य का सियासी तापमान लगातार बढ़ रहा है। अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर ये दोनों नेता अब एक दूसरे के आमने-सामने हैं।
विवाद की जड़: बीज निगम रिश्वत कांड
इस पूरे घमासान की शुरुआत 7 जून को हुई थी, जब राजस्थान राज्य बीज निगम से जुड़े एक कथित रिश्वत कांड में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई की थी। इस मामले में भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी और कई गिरफ्तारियां भी हुई थीं। घटना की एफआईआर में 'मंत्री जी' और 'डॉ. साहब' का जिक्र होने के बाद से कांग्रेस और गोविंद सिंह डोटासरा ने कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा को निशाने पर ले लिया था।
फर्जी प्रमाण-पत्र का आरोप
विवाद तब और गहरा गया जब किरोड़ीलाल मीणा ने 22 जून को मुख्यमंत्री भजनलाल को एक पत्र लिखा। मीणा ने आरोप लगाया कि गोविंद सिंह डोटासरा और उनके संबंधी रमेशचंद पूनिया ने फर्जी ओबीसी प्रमाण-पत्रों का इस्तेमाल करके अपने रिश्तेदारों को राजस्थान प्रशासनिक सेवा यानी आरएएस में नियुक्त कराया है। मंत्री ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
डोटासरा का पलटवार
इस हमले के जवाब में डोटासरा ने बुधवार को पीसीसी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोर्चा खोल दिया। डोटासरा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि किसी को इतना परेशान नहीं करना चाहिए कि उसका बुढ़ापा खराब हो जाए। उन्होंने किरोड़ीलाल मीणा पर निशाना साधते हुए दावा किया कि यही वही नेता हैं जो पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में अपने ऊपर दर्ज मामलों को हटवाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैर पकड़ने तक को तैयार हो गए थे।
लगातार बढ़ती तकरार
डोटासरा और मीणा के बीच यह तकरार नई नहीं है, लेकिन इस बार इसके तेवर काफी तीखे हैं। एसीबी की कार्रवाई के बाद से शुरू हुआ यह घटनाक्रम अब केवल बीज निगम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यक्तिगत आरोपों और कानूनी कार्रवाई की धमकियों में बदल गया है। दोनों ही तरफ से हो रहे हमलों के कारण राज्य में राजनीतिक हलचल बनी हुई है।
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