मदरसों में वंदे मातरम् को लेकर बड़ा फैसला
पश्चिम बंगाल में शिक्षा और संस्कृति से जुड़े एक बड़े निर्णय के तहत राज्य के सभी पंजीकृत मदरसों में अब वंदे मातरम् का गायन अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस बात की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम बंगाल में अब एक राष्ट्रवादी पार्टी की सरकार का शासन है, जिसके लिए सनातनी परंपराएं सर्वोपरि हैं। मदरसों के साथ ही राज्य के स्कूलों में भी राष्ट्रीय गीत का गायन अनिवार्य रूप से सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान किया जाएगा।
सीमा सुरक्षा और डेमोग्राफी पर बड़ा बयान
नेशनल लाइब्रेरी में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने राज्य की सीमाओं को असुरक्षित छोड़ दिया था, जिसके चलते बड़े पैमाने पर घुसपैठ हुई और प्रदेश की डेमोग्राफी यानी जनसांख्यिकीय संरचना में बदलाव आया। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि उनकी भाजपा सरकार सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए कड़े कदम उठा रही है और किसी भी घुसपैठिये को राज्य में टिकने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी सरकार के सत्ता में होने के कारण राज्य की सीमाएं अब सुरक्षित हैं और सनातनी परंपराओं को अक्षुण्ण रखा जाएगा।
पिछली सरकार पर निशाने
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 6 दिसंबर को मनाए जाने वाले शौर्य दिवस के आयोजन पर रोक लगा दी थी, जबकि इसी दिन 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा ढहाया गया था। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनवरी 2024 में जब अयोध्या में भव्य राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम चल रहा था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करते हुए राम मंदिर के विरोध में रैलियां आयोजित करवाई थीं।
कलकत्ता हाईकोर्ट की टिप्पणी
मदरसों में वंदे मातरम् के गायन का मुद्दा कलकत्ता हाईकोर्ट में भी पहुंच चुका है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से कई महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणियां सामने आई थीं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने इस विषय पर चर्चा की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ईसाई मिशनरी स्कूलों में होने वाली प्रार्थनाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर मदरसों में वंदे मातरम् गाया जाता है, तो इससे धर्म नहीं बदल जाता और न ही आसमान टूट पड़ेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति से उसके धर्म के अतिरिक्त कोई पंक्ति बोलने के लिए कहा जाना उसके धार्मिक अस्तित्व को संकट में नहीं डालता है।
शिक्षा विभाग के आदेश
राज्य सरकार ने मई महीने में ही स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी शिक्षण संस्थानों के लिए एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में यह स्पष्ट किया गया था कि स्कूलों में सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान वंदे मातरम् का गायन अनिवार्य होगा। इस आदेश के दायरे में अब पंजीकृत मदरसों को भी शामिल कर लिया गया है, जिसे सरकार अपनी सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी नीति का हिस्सा बता रही है। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम् क्रांतिकारियों के लिए मंत्र की तरह था और आज भी यह भारतीय राष्ट्रवाद का प्रमुख प्रतीक माना जाता है।
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