नाम बदलने की प्रक्रिया रुकी
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। हालांकि यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद ने इसका नाम बदलकर वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी रखने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी थी, लेकिन राज्य सरकार की ओर से इसे अब तक कोई अंतिम स्वीकृति नहीं मिली है। शासन स्तर से फैसला न आने के कारण यह पूरी प्रक्रिया ठंडे बस्ते में चली गई है।
प्रशासन का क्या कहना है
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार समर बहादुर सिंह ने जानकारी दी कि कार्यपरिषद ने जून के शुरुआती दिनों में ही नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। इसके बाद फाइल को अंतिम निर्णय के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया था, क्योंकि नियमों के अनुसार ऐसे मामलों में अंतिम फैसला सरकार को ही लेना होता है। फिलहाल सरकार की ओर से इस पर कोई मुहर नहीं लगी है, जिसके चलते संस्थान अपने पुराने नाम यानी बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के रूप में ही अपनी पहचान बनाए रखेगा।
यूनिवर्सिटी का इतिहास
इस संस्थान की स्थापना वर्ष 1970 में भोपाल यूनिवर्सिटी के तौर पर की गई थी। इसके बाद 1988 में तत्कालीन सरकार ने इसका नाम बदलकर महान क्रांतिकारी मौलाना बरकतउल्ला के सम्मान में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय कर दिया था। जब जून में नाम बदलने का प्रस्ताव आया, तो इसे लेकर राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी बहस शुरू हो गई थी।
कौन थे मौलाना बरकतउल्ला
मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रांतिकारी थे। उन्होंने देश की आजादी के लिए न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम किया था। उनके योगदान के बारे में कुछ मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:
- उन्होंने अफगानिस्तान में रहकर राजा महेंद्र के साथ मिलकर भारत की पहली निर्वासित सरकार का गठन किया था।
- उस सरकार में वे स्वयं प्रधानमंत्री बने थे।
- उन्होंने विदेश में चलाए गए प्रसिद्ध गदर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
- देश की आजादी का सपना संजोए वर्ष 1927 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में उनका निधन हो गया था।
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