हड़ताल खत्म, लेकिन नई उलझन शुरू
हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारियों द्वारा प्रस्तावित हड़ताल के टल जाने के बाद अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकार और कर्मचारी यूनियन के बीच हुई बातचीत के बाद भले ही बसों का संचालन सामान्य होने की उम्मीद जगी हो, लेकिन उन हजारों युवाओं के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है जिन्हें सरकार ने अस्थायी भर्ती के लिए बुलाया था।
1500 रुपये की दिहाड़ी और बेरोजगारों की निराशा
सुक्खू सरकार ने हड़ताल से निपटने के लिए बुधवार को अस्थायी चालकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी। इस दौरान राज्य के 31 डिपो में 656 पदों के लिए 9000 से अधिक चालक ड्राइविंग ट्रायल देने पहुंचे थे। इन उम्मीदवारों को 1500 रुपये दिहाड़ी देने का वादा किया गया था। हालांकि, जैसे ही शाम को सरकार और यूनियन के बीच समझौता हुआ और हड़ताल वापस ली गई, इन युवाओं की उम्मीदें टूट गईं। सोलन के एक आवेदक ने बताया कि उन्हें केवल 750 रुपये देकर वापस भेज दिया गया है, जो उनके साथ हुए धोखे जैसा है।
किन मांगों पर बनी सहमति
सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) आरडी नजीम और निगम के प्रबंध निदेशक निपुण जिंदल के साथ यूनियन की करीब तीन घंटे तक बैठक चली। समझौते के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- 7.10 करोड़ रुपये के लंबित मेडिकल बिलों का भुगतान किया जाएगा।
- 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान 10 दिन के भीतर नकद किया जाएगा।
- नई वर्दी देने का वादा एक महीने के भीतर पूरा किया जाएगा।
- 12 महीने का ओवरटाइम और नाइट ओवरटाइम देने पर सहमति बनी है।
- एसीपी योजना (4-9-14) के विकल्पों में ढील के लिए मामला वित्त विभाग को भेजा जाएगा।
- ‘मेडिपर्सन एक्ट’ के मसले को 15 दिन के भीतर सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
यूनियन का पक्ष
चालक संघ के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने स्पष्ट किया कि सरकार के साथ समझौता जरूर हुआ है, लेकिन उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की गई हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में किए गए तबादलों को रद्द करने और हर महीने की पहली तारीख को वेतन देने का भरोसा मिला है। परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी इस बात की पुष्टि की है कि प्रस्तावित हड़ताल को समाप्त कर दिया गया है।
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