बरसात का मौसम शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इसके साथ ही किसान धान की रोपाई की तैयारी में जुट गए हैं। अगर आप किसान हैं और चाहते हैं कि आगे चलकर आपकी धान की फसल में खरपतवार न पनपे, तो रोपाई से पहले एक जरूरी काम जरूर कर लें। इससे आपकी फसल में खरपतवार की परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी। आइए जानते हैं कि वे कौन-से जरूरी उपाय हैं, जिन्हें अपनाने पर फसल में खरपतवार नहीं उगते।
जानकारी के अभाव में सही नहीं हो पाती खेती
जिला कृषि अधिकारी सोम प्रकाश गुप्ता ने बातचीत में बताया कि पूर्वांचल में अधिकतर किसान धान की खेती संडा विधि से करते हैं। पर्याप्त जानकारी न होने के कारण इस विधि में किसानों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खरपतवार खत्म करने के लिए किसान काफी पैसा और रसायन खर्च करते हैं, जबकि थोड़ी समझदारी और सावधानी अपनाकर इस अतिरिक्त खर्च से आसानी से बचा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस समय किसान धान की नर्सरी तैयार कर रहे हैं और करीब 21 दिन बाद संडा की रोपाई की जाती है। रोपाई से पहले कुछ जरूरी काम कर लेने से खरपतवार की समस्या में बड़ी कमी आ सकती है।
रोपाई से 20-25 दिन पहले करें हल्की सिंचाई
सोम प्रकाश गुप्ता के मुताबिक, जब खेत में अंतिम रोपाई करनी हो, तो उससे 20 से 25 दिन पहले किसी भी साधन से हल्की सिंचाई कर दें। ऐसा करने पर खेत में मौजूद खरपतवार के बीज अंकुरित होकर उगने लगते हैं और अधिकांश खरपतवार ऊपर निकल आते हैं।
जब इन खरपतवारों में दो से तीन पत्तियां निकल आएं, तब रोपाई से पहले खेत में पानी भरकर कीचड़ वाली जुताई करें और खरपतवारों को मिट्टी में दबा दें। कीचड़ में दबने के बाद जब धान की रोपाई की जाती है, तो ये खरपतवार दोबारा नहीं उग पाते।
80 प्रतिशत तक घट सकती है खरपतवार की समस्या
उन्होंने बताया कि रोपाई से पहले हल्की सिंचाई करने पर उस मौसम में उगने वाले 80 से 90 प्रतिशत खरपतवार पहले ही अंकुरित हो जाते हैं। यदि इन खरपतवारों को रोपाई से पहले कीचड़ में दबा दिया जाए, तो लगभग 80 प्रतिशत तक खरपतवार की समस्या समाप्त हो सकती है। इससे किसान खरपतवार नियंत्रण पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से बच जाते हैं।
धान की फसल में खरपतवार आने पर महंगे रसायनों और खरपतवारनाशकों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ फसल पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए यदि आप धान की रोपाई करने जा रहे हैं, तो पहले खेत में हल्की सिंचाई करें और उगे हुए खरपतवारों को जुताई के दौरान कीचड़ में दबा दें। इससे आपकी फसल मजबूत होगी और खरपतवार की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी।
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