गर्भ में गंभीर हृदय रोग का पता चला
जयपुर स्थित महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक जटिल केस को सफलतापूर्वक हल किया है। मामला गर्भावस्था के 25वें सप्ताह का है, जब जांच के दौरान पता चला कि गर्भ में पल रहे भ्रूण को सुप्रावेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (SVT) नामक एक अत्यंत दुर्लभ हृदय संबंधी बीमारी हो गई है। यह स्थिति भ्रूण के लिए काफी खतरनाक थी क्योंकि इससे बच्चे के दिल के काम करना बंद करने यानी हार्ट फेलियर का पूरा जोखिम था।
डॉक्टरों ने कैसे दी चुनौती को मात
इस नाजुक स्थिति में फीटल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रेरणा भट ने मोर्चा संभाला। उन्होंने गर्भवती महिला का उपचार करने के लिए ट्रांसप्लेसेंटल एंटी-अरिदमिक थैरेपी का सहारा लिया। इस विशेष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से दवाएं सीधे मां के जरिए भ्रूण तक पहुंचाई गईं, जिससे बच्चे की असामान्य धड़कनों को नियंत्रित कर उसे सामान्य स्थिति में लाया जा सका।
जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ
इलाज के बाद गर्भावस्था के 35वें सप्ताह में सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराया गया। डॉक्टरों की सतर्कता और सही समय पर लिए गए उपचार का परिणाम यह रहा कि बच्चा और मां दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। यह मामला मेडिकल साइंस की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भ्रूण की हृदय गति को इस प्रकार नियंत्रित करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
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