मौसंबी खरीदने से पहले जरूर देखें यह निशान, मीठे और रसीले फल की ऐसे करें पहचान

अगर आप बाजार में मीठी मौसंबी की तलाश कर रहे हैं, तो एक छोटा सा निशान आपको सही फल चुनने में मदद कर सकता है। थाईलैंड मूल की मौसंबी अपनी मिठास के लिए जानी जाती है और इसकी पहचान करना बेहद आसान है।

मौसंबी की पहचान का आसान तरीका

बाजार में मौसंबी खरीदते समय अक्सर लोग देसी और विदेशी किस्मों के बीच उलझ जाते हैं। अगर आप भी मीठी और रसीली मौसंबी की तलाश में रहते हैं, तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। थाईलैंड मूल की मौसंबी को उसकी बनावट से ही पहचाना जा सकता है। इस किस्म की मौसंबी के निचले हिस्से पर सिक्के जैसी गोल आकृति का एक खास निशान होता है। इसके विपरीत, देसी मौसंबी पूरी तरह से चिकनी और बिना किसी निशान वाली होती है।

क्यों खास है थाईलैंड वाली मौसंबी

बिहार के पश्चिम चंपारण में सफल बागवानी कर रहे शिशिर दूबे के अनुसार, थाईलैंड से आई मौसंबी की किस्म का स्वाद देसी मौसंबी की तुलना में कहीं अधिक मीठा होता है। इसका जूस मिश्री जैसा स्वाद देता है, जिसके कारण जूस विक्रेताओं और ग्राहकों के बीच इसकी काफी मांग रहती है।

मुनाफे की नई राह

इस किस्म की खेती किसानों के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित हो रही है। शिशिर दूबे ने वर्ष 2020 में अपने 3 एकड़ के बगीचे में 750 पौधे लगाकर इसकी शुरुआत की थी। आज ये पौधे फल देने लगे हैं और एक पेड़ से करीब 40 किलो तक मौसंबी प्राप्त हो रही है। इस बार कुल 12 टन तक फसल होने की उम्मीद है। बाजार में इसकी अच्छी मांग होने के कारण यह सीधे खेतों से ही 80 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही है।

भविष्य में बढ़ेगी पैदावार

बागवानी के जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे पेड़ बड़े होते जाएंगे, फलों के उत्पादन में भी भारी वृद्धि होगी। एक समय ऐसा आएगा जब प्रति पेड़ एक क्विंटल तक फल प्राप्त किया जा सकेगा। पारंपरिक फसलों की तुलना में मौसंबी की यह उन्नत किस्म किसानों के लिए आय का एक बेहतरीन जरिया बन रही है। अगर आप भी इसकी बागवानी करना चाहते हैं, तो पौधा खरीदते समय थाईलैंड वैरायटी होने की पुष्टि जरूर कर लें।

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