डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी में ही मचा घमासान, पाकिस्तान और कतर को मध्यस्थ बनाने पर घिरे राष्ट्रपति

ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में पाकिस्तान और कतर की भूमिका को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं ने कड़ी नाराजगी जताई है। सीनेटरों ने इन देशों को आतंकवाद का समर्थक बताते हुए ट्रंप प्रशासन के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं।

पार्टी के भीतर विरोध की लहर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने उनकी अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी में खलबली मचा दी है। यह विवाद ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति वार्ता में पाकिस्तान और कतर को मध्यस्थ के तौर पर शामिल करने के निर्णय से उपजा है। पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने इस कदम का खुलकर विरोध किया है।

सीनेटरों ने उठाए सवाल

रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटरों का मानना है कि जिन देशों पर खुद आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप हैं, उन्हें शांति दूत बनाना एक बड़ी रणनीतिक भूल है। सीनेटर टिम शीही ने एक टेलीविजन साक्षात्कार के दौरान तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि पाकिस्तान और कतर जैसे देश आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह रहे हैं।

आईएसआई और ओसामा बिन लादेन का जिक्र

इस विरोध को और अधिक मुखर करते हुए सीनेटर टिम शीही ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इतिहास पर उंगली उठाई है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे इस एजेंसी ने अमेरिकी हितों के विपरीत काम किया और अल-कायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन को अपने यहां पनाह देकर छिपाया था। उनके अनुसार, जिस देश का इतिहास ऐसा रहा हो, उसे निष्पक्ष मध्यस्थ मान लेना बिल्कुल गलत और खतरनाक है।

  • अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसले पर पार्टी में मतभेद।
  • पाकिस्तान और कतर को आतंकवाद का समर्थक माना जा रहा है।
  • सीनेटरों ने आईएसआई की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
  • शांति वार्ता की निष्पक्षता पर बना संशय।

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