विश्व नाविक दिवस: समुद्र में काम करने वाले गुमनाम नायकों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद समुद्री सुरक्षा पर चिंताएं बढ़ गई हैं। कमोडोर श्रीकांत केसनूर ने वैश्विक व्यापार के लिए रीढ़ समान नाविकों की सुरक्षा को लेकर विशेष चर्चा की है।

समुद्री संघर्ष और नाविकों की सुरक्षा

हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष ने न केवल मध्य पूर्व में तनाव बढ़ाया है बल्कि समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिए भी बड़े खतरे पैदा कर दिए हैं। इस संघर्ष की जद में आकर तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई। 25 जून को मनाए जाने वाले वर्ल्ड सीफेरर्स डे के अवसर पर भारतीय नौसेना के अनुभवी अधिकारी कमोडोर श्रीकांत केसनूर ने इन घटनाओं और समुद्री सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बात की।

सर्टाबेलो मामला और अमेरिकी कार्रवाई पर सवाल

कमोडोर केसनूर ने सर्टाबेलो जहाज पर हुए हमले को लेकर चिंता जताई। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि यह जहाज नाकेबंदी तोड़कर प्रतिबंधित सामान ले जा रहा था, जिसके जवाब में बल प्रयोग किया गया। हालांकि, केसनूर का मानना है कि सैन्य कमांडर द्वारा मिसाइल का उपयोग करना अत्यधिक बल का प्रयोग प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चेतावनी और संचार के अन्य माध्यमों का उपयोग पहले किया जाना चाहिए था, न कि सीधे घातक हमला।

समुद्री नाविकों के सामने मौजूद चुनौतियां

समुद्र के रास्ते दुनिया का लगभग 90 प्रतिशत व्यापार होता है, लेकिन इसके पीछे काम करने वाले नाविकों का जीवन हर पल जोखिम भरा रहता है। कमोडोर केसनूर के अनुसार, नाविकों को मुख्य रूप से इन खतरों का सामना करना पड़ता है:

  • समुद्री डकैती और सशस्त्र लूटपाट।
  • हूती जैसे सशस्त्र समूहों से मिलने वाली धमकियां।
  • ड्रोन और सटीक निर्देशित मिसाइलों का बढ़ता उपयोग।
  • खराब मौसम और संचार संबंधी तकनीकी कठिनाइयां।
  • युद्धग्रस्त क्षेत्रों से गुजरने पर अनिश्चितता का माहौल।

भारतीय नाविकों की स्थिति और आत्मनिर्भरता की राह

वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 3 लाख से अधिक भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जो वैश्विक समुद्री समुदाय का एक बड़ा हिस्सा हैं। कमोडोर केसनूर ने एक महत्वपूर्ण विरोधाभास की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत दुनिया को बड़ी संख्या में प्रशिक्षित नाविक प्रदान करता है, लेकिन भारत का अपना समुद्री व्यापार काफी हद तक विदेशी जहाजों पर निर्भर है। भारत के कुल व्यापार का केवल 5 से 6 प्रतिशत हिस्सा ही भारतीय ध्वज वाले जहाजों के जरिए होता है।

भविष्य के लिए सुझाव

भारत को समुद्री क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने की आवश्यकता है:

  • जहाज निर्माण: भारत में जहाज निर्माण उद्योग को प्रोत्साहन देना ताकि अधिक जहाज भारतीय ध्वज के तहत आ सकें।
  • सरल प्रक्रियाएं: पंजीकरण, बीमा और नियामकीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाना।
  • वैश्विक भूमिका: समुद्री प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने वाली संस्थाओं में भारत की भागीदारी बढ़ाना।
  • आत्मनिर्भरता: राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सैन्य और समुद्री शक्ति का विस्तार करना।

अंत में कमोडोर केसनूर ने जोर दिया कि संकट के समय आत्मनिर्भरता ही एकमात्र विकल्प है और भारत को अपनी रणनीतिक तैयारी को और अधिक दीर्घकालिक बनाना होगा।

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