ओडिशा में बनेगा विशाल डीप-सी पोर्ट, समुद्र के बीचों-बीच तैयार होगा व्यापार और सुरक्षा का नया केंद्र

ओडिशा के गंजाम में 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से एक नया डीप-सी पोर्ट बनाया जाएगा, जो भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

गंजाम में होगा मेगा प्रोजेक्ट का निर्माण

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने हाल ही में राज्य में एक बड़े बुनियादी ढांचे के निर्माण की घोषणा की है। इस योजना के तहत ओडिशा के गंजाम में एक अत्याधुनिक डीप-सी पोर्ट और पारादीप में एक शिपबिल्डिंग क्लस्टर का निर्माण किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 50 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि यह कदम राज्य को भारत का सबसे बड़ा समुद्री हब बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।

क्या पानी के अंदर बनेगा यह पोर्ट?

आम धारणा के विपरीत, डीप-सी पोर्ट का मतलब पानी के नीचे बनने वाली कोई गुप्त गुफा या अंडरवाटर स्ट्रक्चर नहीं है। सामान्य बंदरगाह तटों पर होते हैं जहां पानी की गहराई कम होती है, लेकिन दुनिया के विशालकाय कार्गो जहाजों को तैरने के लिए 15 से 20 मीटर तक गहरे पानी की आवश्यकता होती है। यदि ये जहाज कम गहरे पानी में आते हैं, तो उनके टकराने का खतरा रहता है। इसलिए, डीप-सी पोर्ट का निर्माण या तो तट से दूर गहरे पानी में कृत्रिम द्वीप बनाकर किया जाता है, या मशीनों द्वारा समुद्र के तल को गहरा खोदा जाता है ताकि बड़े जहाज सीधे वहां तक पहुंच सकें।

क्यों खास है यह डीप-सी पोर्ट?

यह पोर्ट केवल माल ढुलाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह समुद्री व्यापार और सुरक्षा का एक अभेद्य किला बनेगा। यहां बड़े जहाजों के निर्माण, मरम्मत और रखरखाव की सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रोजेक्ट 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देगा और राज्य में लाखों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।

समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक महत्व

इस मेगा प्रोजेक्ट की घोषणा भुवनेश्वर में आयोजित 14वीं मल्टी-एजेंसी मैरीटाइम सिक्योरिटी ग्रुप मीटिंग के दौरान हुई। यह पहली बार है जब यह महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली से बाहर ओडिशा में आयोजित की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, ओडिशा का 575 किलोमीटर लंबा समुद्री तट प्राचीन काल से ही व्यापारिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। आज के दौर में समुद्री सुरक्षा का अर्थ केवल तस्करी रोकना नहीं, बल्कि साइबर हमलों से बचाव और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करना है। इस उद्देश्य के लिए केंद्र और राज्य की सभी सुरक्षा एजेंसियां मिलकर एक साझा सुरक्षा चक्र तैयार कर रही हैं।

दुनिया के प्रमुख डीप-सी पोर्ट्स

भारत की इस नई योजना के समानांतर दुनिया में कई ऐसे बंदरगाह हैं जो इंजीनियरिंग के चमत्कार माने जाते हैं:

  • यांगशान डीप-वाटर पोर्ट (चीन): इसे छोटे द्वीपों को जोड़कर बनाया गया है और मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए 32 किलोमीटर लंबा पुल बनाया गया है।
  • पोर्ट ऑफ रॉटरडैम (नीदरलैंड): यह यूरोप का सबसे बड़ा डीप-सी पोर्ट है जो विशालकाय जहाजों को संभालने में सक्षम है।
  • ग्वादर पोर्ट (पाकिस्तान): अरब सागर में स्थित यह पोर्ट रणनीतिक नजरिए से वैश्विक चर्चा में रहता है।
  • सिंगापुर पोर्ट: यह दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक है और वैश्विक व्यापार का मुख्य केंद्र है।

https://hindi.news18.com/news/nation/odisha-ganjam-deep-sea-port-and-paradip-shipbuilding-cluster-approved-ws-l-10600659.html